
उदित वाणी, रांची : झारखंड सरकार ने मेडिकल शिक्षा को एकीकृत और बेहतर स्वरूप देने की दिशा में बड़ी पहल की है. रांची के ब्रांबे में राज्य में पहली मेडिकल यूनिवर्सिटी स्थापित की जा रही है.
सरकार ने इसे “झारखंड स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय” के रूप में अधिसूचित करते हुए शुक्रवार को एम्स, दिल्ली में कार्यरत डॉ. सुधीर कुमार गुप्ता को कुलपति नियुक्त कर दिया है. अधिसूचना के अनुसार, वह अधिकतम तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक अथवा अगले आदेश तक इस पद पर बने रहेंगे. इस यूनिवर्सिटी के शुरू होने के बाद राज्य के सभी मेडिकल, डेंटल, नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थान एक ही व्यवस्था के तहत आ जाएंगे.
इन सभी संस्थानों में पाठ्यक्रम, परीक्षा और अन्य शैक्षणिक व्यवस्था का संचालन एकीकृत तरीके से इसी विश्वविद्यालय के जरिए होगा. शुरुआती तौर पर इस यूनिवर्सिटी को रांची के ब्रांबे स्थित पंचायती राज प्रशिक्षण संस्थान परिसर से चलाया जाएगा. यह एक अस्थायी व्यवस्था होगी. यहां पहले से मौजूद भवन और सुविधाओं के कारण काम जल्दी शुरू किया जा सकता है.
इस परिसर में पर्याप्त जगह और बुनियादी ढांचा मौजूद है, जिसका इस्तेमाल यूनिवर्सिटी संचालन के लिए किया जाएगा. पूर्व में इसी परिसर में झारखंड सेंट्रल यूनिवर्सिटी का संचालन हो रहा था. राज्य में मेडिकल और पैरा मेडिकल शिक्षण संस्थान अब तक अलग-अलग विश्वविद्यालयों से संबद्ध होकर संचालित हो रहे हैं. इस वजह से परीक्षा में देरी, रिजल्ट लेट आना और प्रशासनिक समन्वय की कमी जैसी परेशानियां सामने आ रही हैं.
झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि राज्य में मेडिकल यूनिवर्सिटी का संचालन शुरू होने से चिकित्सा शिक्षा और सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा. छात्रों के लिए यह बदलाव खास तौर पर महत्वपूर्ण होगा. पढ़ाई और परीक्षा का सिस्टम अधिक व्यवस्थित होगा, और यूजी-पीजी सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी. इससे राज्य में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जो लंबे समय से एक बड़ी जरूरत रही है.
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का कहना है कि इस यूनिवर्सिटी के जरिए मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ रिसर्च को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे झारखंड में बेहतर डॉक्टर तैयार होंगे और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा.
उन्होंने कहा, “राज्य के करीब 500 स्वास्थ्य संस्थानों को एक साथ जोड़ने की दिशा में हमने अहम कदम उठाया है. मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों के एक ही व्यवस्था के तहत आने से इनके कामकाज में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेगी.” गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इस यूनिवर्सिटी की घोषणा पहले ही बजट में कर दी थी और दिसंबर में इसके लिए ब्रांबे स्थित परिसर का निरीक्षण भी किया गया था.
(आईएएनएस)

