
रामदास सोरेन के काम, हेमंत सोरेन के नाम व संगठन की ताकत के बूते मैदान मारने की आस
उदित वाणी, घाटशिला : राज्य के पूर्वी सिंहभूम जिले में अनुसूजित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीट घाटशिला में 11 नवंबर को होनेवाले उपचुनाव की सारी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. रविवार शाम पांच बजे प्रचार अभियान पर विराम लग गया और झामुमो के सोमेश सोरेन व भाजपा के बाबूलाल सोरेन समेत सभी 13 प्रत्याशियों व उनकी टीम के सदस्य घर घर जाकर संपर्क करने व मतदान के लिए बूथ प्रबंधन में जुट गए हैं.
प्रचार का अंतिम दिन रविवार सभी के लिए शक्ति प्रदर्शन का अवसर रहा. हर इलाके में बाइक रैली या रोड शो के जरिए अपने पक्ष में माहौल बनाने का काम किया गया. हालांकि इसके बाद झामुमो व भाजपा के खेमों में जो नजारा देखने को मिला उससे साफ पता चल रहा था कि राज्य के सत्ताधारी झामुमो के कार्यकर्ताओं का उत्साह सिर चढ़कर बोल रहा है. अपने कैडर की ताकत, पार्टी के आधार, नेताओं के करिश्मा, राज्य सरकार के काम, रामदास सोरेन के नाम व प्रत्याशी सोमेश सोरेन की हर इलाके में अपनी पहचान के बूत मैदान मारने को पूरी तरह आशावान दिख रहे झामुमो कार्यकर्ताओं का अब फोकस बूथ प्रबंधन व ज्यादा से ज्यादा मतदान कराने के लिए लोगों को प्रेरित करने पर आकर टिक गया है.
दूसरी ओर भाजपा भी पूरी तरह कमर कसकर तैयार है. पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन अपने पुत्र व पार्टी प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन की जीत सुनिश्चित कराने के लिए कोई जतन बाकी रहने देने नहीं चाहते. रविवार को रोड शो के माध्यम से दमखम दिखाने के बाद चंपाई के मार्गदर्शन में भाजपा भी बूथ प्रबंधन में पूरी शिद्दत के साथ जुट गयी है.
हिसाब-किताब को अपने अनुकूल देख रहा झामुमो
11 नवंबर को कुल 2 लाख 55 हजार 823 मतदाता उपचुनाव में किस्मत आजमा रहे 13 प्रत्याशियों की किस्मत को ईवीएम में कैद करेंगे. हालांकि मतदाताओं की प्रोफाइल, इलाके के विवरण, अपने तंत्र व बूथवार विवरण का बारीकी से आकलन करने के बाद झामुमो कैंप मैदान मारने को लेकर आश्वस्त है. पार्टी के एक रणनीतिकार ने रविवार देर शाम बातचीत में दावा किया कि स्थिति पूरी तरह उनकी पार्टी के अनूकूल है. प्रचार के दौरान हेमंत सोरेन व कल्पना सोरेन के करिश्मा ने जादू किया. उन्होंने कहा कि यदि आज यानी रविवार को हुए रोड शो का आधार मानें तो ताल ठोकर कर कहा जा सकता है कि बाजी हमारे पक्ष में है.
बताया जाता है कि झामुमो को अपने इस इलाके में मजबूत संगठन व पार्टी के नाम व चिन्ह से लोगों के भावनात्कम लगाव से खास आस है. विधायक व फिर मंत्री के रूप में रामदास सोरेन की ओर से किए गए कार्यों का लोगों के बीच झामुमो को लेकर सकारात्मक असर दिखाने की आस पार्टी कर रही है. अपने अल्प मंत्री काल में ही रामदास सोरेन ने विकसित घाटशिला का खाका खींच दिया था. जनजातीय विश्व विद्यालय व इंजीनयरिंग कालेज का आधार तैयार करने का श्रेय रामदास सोरेन के खाते में पहले से ही रहा है. अब हेमंत सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के असर से झामुमो को फायदा मिलने की आस पार्टी कर रही है.
सहानुति लहर भी चलने की कर रहे उम्मीद
झामुमो के भीतर माना जा रहा कि पूरे प्रचार अभियान के दौरान कहीं भी सत्ता विरोधी रुख लोगों के बीच देखने को नहीं मिला और न ही रामदास सोरेन के परिवार के प्रति ही नाराजगी नजर आयी. झामुमो को प्रचार के दौरान अहसास हुआ कि घाटशिला के लोगों के हर सुख-दुख में शामिल रहनेवाले रामदास सोरेन के असामयिक निधन से मतदाता भी दुखी हैं और उनकी सहानुभूति सोरेन परिवार के प्रति है. उधर जब प्रचार के दौरान रामदास सोरेन की पत्नी की आंखें नम हो गयीं तो उनके आंसूओं के भी भावनात्मक असर होने की आस झामुमो कर रहा है.
इलाके को टू जी नेता मिलने का रास्ता साफ
घाटशिला उपचुनाव का नतीजा चाहे जो हो लेकिन एक बात साफ है कि इलाके को सोमेश सोरेन के रूप में टू जी यानी दूसरी पीढ़ी का नेता मिलने का रास्ता साफ हो गया है. उपचुनाव के नतीजे के पहले ही वे एक नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं. वैसे तो कई वर्ष पहले से वे राजनीति में सक्रिय थे. पिता के काम में सहयोग करने के लिए घाटशिला के लोगों के संपर्क में थे. क्षेत्र का नियमित दौरा करते थे. लोगों को मिलते जुलते रहते थे. इसीलिए पार्टी प्रत्याशी बनने पर भी उन्हें लोगों के बीच अपना परिचय देने में समय जाया नहीं करना पड़ा. कोल्हान में 1990 के दशक में जितने झामुमो नेता उभरे, वैसे नेताओं की दूसरी पीढ़ी में सोमेश ने अपनी पहचान बनाने में लंबी लकीर खींच दी है. प्रचार के दौरान उनका अलग व्यक्तित्व उभर कर सामने आया है. यह स्थिति उनके लिए काफी अनुकूल मानी जा रही है.
झामुमो-भाजपा के बीच तीसरा कोण बना रहा जेएलकेएम
पूरे चुनाव प्रचार में मतदाता झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी के इर्द-गिर्द घूमते रहे. कंही कंही जेएलकेएम ने भी अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज कराई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के समक्ष अपने इस घर को बचाने की चुनौती है तो भारतीय जनता पार्टी को नया इतिहास लिखने का अवसर है.
झारखंड मुक्ति मोर्चा का रहा है गढ़
2009 से पहले घाटशिला विधानसभा की सीट लगातार तीन कार्यकाल तक कांग्रेस के कब्जे में रही. प्रदीप कुमार बलमुचू तीन बार कांग्रेस से विधायक बने. हालांकि उस दौरान भी झामुमो अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराता रहा. उसके पश्चात 2009 के चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी रामदास सोरेन ने पहली बार जीत दर्ज की थी. हालांकि वर्ष 2014 में मोदी की आंधी में बहुत कम मतों के अंतर से यह सीट भाजपा के प्रत्याशी लक्ष्मण टुडू के खाते में चली गई. इसके बावजूद रामदास सोरेन हिम्मत नहीं हारे और घाटशिला विधान सभा क्षेत्र के लोगों की अपने परिवार की तरह सेवा करते रहे.
निरंतर आना-जाना और यहां लोगों की समस्याओं का समाधान करना जारी रखा जिससे झारखंड मुक्ति मोर्चा घाटशिला की सीट पर अपनी मजबूती बनाते चला गया और वर्ष 2019 के चुनाव में रामदास सोरेन विपरीत परिस्थितियों में भी घाटशिला विधानसभा की सीट को झारखंड मुक्ति मोर्चा के खाते में डाल दिया और यह संदेश दिया की जनता झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्रति समर्पित हो गई है 2019 के चुनाव में त्रिपक्षीय संघर्ष के बावजूद झामुमो ने अपनी मजबूत उपस्थिति को दर्शाया. इस चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी लखन चंद्र मार्डी को पराजय के मुंह देखना पड़ा.
वर्ष 2024 के चुनाव में भी झामुमो के रामदास सोरेन ने अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा के प्रत्याशी बाबूलाल सोरेन को लगभग 22000 से अधिक मतों से पराजित किया. अपने व्यक्तित्व, मिलनसार प्रवृत्ति, स्पष्टवादिता और जनता के साथ घनिष्ठता के कारण रामदास सोरेन ने झामुमो को घाटशिला में एक मजबूत संगठन के रूप में खड़ा किया. हालांकि रामदास सोरेन के असामयकि निधन से उपचुनाव की स्थिति आ खड़ी हुई है.
दमखम व गंभीरता से झामुमो ने लड़ा चुनाव
इस उपचुनाव में झामुमो ने स्वर्गीय रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश सोरेन को अपना प्रत्याशी बनाया.चुनाव की घोषणा के बाद से ही झामुमो के कर्मठ कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी को जीतने के लिए दिन-रात एक किए हुए रहेे झारखंड सरकार के मंत्री-विधायक, स्वयं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडेय की विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के द्वारा धुआंधार प्रचार किया गया. बूथ स्तर तक लोगों के संपर्क में रहने से झामुमो ने अपनी मजबूत स्थिति को बरकारा रखा.
गुरुजी की चर्चा हर जगह
इस उपचुनाव में झामुमो के नेता व कार्यकर्ता गुरुजी यानी दिशोम गुरु शिबू सोरेन की हर जगह शिद्दत से चर्चा करते रहे और लोगों को यह बचाने के नहीं चूके कि गुरुजी के निधन के बाद राज्य में यह पहला चुनाव यानी उपचुनाव हो रहा है. इसलिए पार्टी के सभी नेताओं व कार्यकर्ताओं का नैतिक दायित्व बनता है कि घाटशिला के नतीजे के पार्टी के पक्ष में लाकर रामदास सोरेन के अलावा गुरुजी को भी श्रद्धांजलि दें. यह भाव पार्टी के अंदर करो या मरो के अंदाज में कार्य करने को प्रेरित करता दिखा पूरे प्रचार के दौरान. खास बात यह कि सहयोगी दल कांग्रेस का भी पूरा साथ मिल रहा झामुमो को. भाजपा समेत कई दलों के अनेक लोग पार्टी में शामिल हुए्. इसका भी मनोवैज्ञानिक असर लोगों पर होने की उम्मीद झामुमो के रणनीतिकार कर रहे और इस लिए भी नतीजे को अपने पक्ष में आने को लेकर पूरी तरह आशावान दिख रहे हैं.

