
उदित वाणी, जमशेदपुर : मानगो के आजाद बस्ती रोड नंबर 14 निवासी सैयद अर्शियान उर्फ हैदर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिकंजा कस गया है. इंटरपोल ने सीबीआई के अनुरोध पर उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया है. इस नोटिस के बाद अब उसकी गिरफ्तारी की संभावना और प्रबल हो गई है. बताया जा रहा है कि अर्शियान वर्तमान में तुर्किए में छिपा हुआ है और वहीं से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है.
आठ साल पुराना आतंकी संगठन से जुड़ाव का आरोप
करीब 40 वर्षीय अर्शियान पर आठ साल पहले आतंकी संगठन अलकायदा से जुड़ाव का आरोप लगा था. इसी मामले में वर्ष 2017 में उसके भाई जीशान अली हैदर को सऊदी अरब से प्रत्यर्पित कर दिल्ली में गिरफ्तार किया गया था. जांच एजेंसियों का दावा है कि अर्शियान आतंकी नेटवर्क का तकनीकी विशेषज्ञ है, जिसने इस्लामिक स्टेट के लिए आत्मघाती ड्रोन और शॉर्ट-रेंज मिसाइलें बनाने में अहम भूमिका निभाई.
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से की पढ़ाई
अर्शियान कभी जमशेदपुर का सामान्य छात्र था. उसने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. वर्ष 2005 में वह बैंगलुरु गया और कुछ समय एक मदरसे में भी रहा, लेकिन उस समय उसके खिलाफ कोई आतंकी संबंध सामने नहीं आए. बाद में वर्ष 2008 में वह सऊदी अरब के दम्माम चला गया, जहां सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी के दौरान उसकी मुलाकात बेल्जियम की चेचन मूल की नागरिक अलीना हैदर से हुई. दोनों ने विवाह किया और एक बेटी भी है.
दम्माम बना जिहादी गतिविधियों का केंद्र
रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2012 से 2015 के बीच दम्माम स्थित उसका घर जिहादी सोच रखने वाले भारतीय युवाओं का अड्डा बन गया था. इसी दौरान उसकी मुलाकात मौलवी अब्दुल रहमान अली खान से हुई, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा था. अर्शियान ने कथित रूप से उसे यूएई के रास्ते पाकिस्तान भेजने में आर्थिक मदद भी की. जांच एजेंसियां मानती हैं कि उसे अलकायदा के लिए भारतीय युवाओं की भर्ती का जिम्मा भी सौंपा गया था.
वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुका अर्शियान
सीबीआई के अनुसार अर्शियान अब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद की दुनिया में एक बड़ा नाम बन चुका है. उस पर आरोप है कि वह 2017 से तुर्किए में छिपा हुआ है और वहीं से तकनीकी सहयोग देकर आतंकी संगठनों को और खतरनाक बना रहा है.
क्या होता है रेड कॉर्नर नोटिस?
रेड कॉर्नर नोटिस किसी व्यक्ति के खिलाफ इंटरपोल द्वारा जारी की जाने वाली अंतरराष्ट्रीय चेतावनी है. यह नोटिस किसी भी देश की पुलिस से अनुरोध करता है कि वे संबंधित व्यक्ति को खोजें और अस्थायी रूप से गिरफ्तार करें. हालांकि यह सीधे तौर पर गिरफ्तारी वारंट नहीं होता, लेकिन यह दर्शाता है कि संबंधित व्यक्ति कानूनी रूप से भगोड़ा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित है.
अब गिरफ्तारी की उम्मीद तेज
रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद भारतीय एजेंसियां अर्शियान की गिरफ्तारी को लेकर और सक्रिय हो गई हैं. इंटरपोल के जरिए अब उसकी लोकेशन और गतिविधियों पर करीबी निगरानी रखी जा रही है. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अर्शियान जैसे भगोड़े आतंकियों को पकड़ना सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से भी अहम है.

