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	<title>Indian Government Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>Indian Government Archives - Udit Vani</title>
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		<title>New Delhi: सरकार ने 15 बड़े बैंकों को 2029 तक सोना-चांदी आयात की दी मंजूरी</title>
		<link>https://uditvani.in/new-delhi/central-government-allows-15-banks-gold-silver-import-dgft-notification-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 12:42:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Banking News Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली: 17 अप्रैल केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 15 बड़े बैंकों को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2029 तक सोना और चांदी आयात करने की अनुमति दे दी है। इस सूची में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे प्रमुख बैंक शामिल हैं। वहीं, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली:</span> </strong>17 अप्रैल केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 15 बड़े बैंकों को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2029 तक सोना और चांदी आयात करने की अनुमति दे दी है। इस सूची में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे प्रमुख बैंक शामिल हैं। वहीं, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और स्बरबैंक को इस अवधि में केवल सोना आयात करने की अनुमति दी गई है। यह अधिसूचना डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) द्वारा जारी की गई है।</p>
<p>सरकार का यह कदम बुलियन (सोना-चांदी) के आयात को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। केवल अधिकृत बैंकों के जरिए आयात करने से लेनदेन की निगरानी आसान होगी और अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अधिकृत बैंकों में एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, डॉयचे बैंक, फेडरल बैंक, इंडसइंड बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक समेत कई अन्य बैंक शामिल हैं, जिन्हें सोना और चांदी, दोनों आयात करने की अनुमति दी गई है। इस बीच, मार्च 2026 में भारत का सोने का आयात घटकर 9 महीने के निचले स्तर 3.1 अरब डॉलर पर आ गया।</p>
<p>मात्रा के हिसाब से यह करीब 20-25 टन रहा, जो पिछले 12 महीनों के औसत 62 टन से काफी कम है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) के अनुसार, इसकी वजह मांग में कमी और मध्य पूर्व से सप्लाई में बाधाएं हैं, जो भारत के लिए एक अहम ट्रांजिट हब है। अप्रैल में सोने की कीमतों में कुछ सुधार देखने को मिला है। वहीं, इंपोर्ट में कमी और सप्लाई की दिक्कतों के कारण घरेलू बाजार में छूट (डिस्काउंट) भी कम हुई है। सूचीबद्ध ज्वैलरी कंपनियों ने 2026 की पहली तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया, जिसमें शादी के सीजन, बढ़े हुए खर्च और बिजनेस विस्तार का योगदान रहा। इसके अलावा, भारत में गोल्ड ईटीएफ में निवेश लगातार 11वें महीने भी जारी रहा।</p>
<p>एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (एएमएफआई) के आंकड़ों के अनुसार, ईटीएफ में मार्च 2026 में करीब 22.7 अरब रुपए (244 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का शुद्ध निवेश हुआ। बयान में कहा गया है कि गोल्ड ईटीएफ में निवेशकों की रुचि बनी हुई है और खातों या फोलियो की संख्या में वृद्धि से पता चलता है कि यह रुचि धीमी गति से ही सही, लेकिन बढ़ रही है। डिजिटल गोल्ड की खरीदारी भी मजबूत बनी रही। फरवरी में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए करीब 30.3 अरब रुपए का डिजिटल गोल्ड खरीदा गया, जो मात्रा के हिसाब से लगभग 1.9 टन के बराबर है।</p>
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		<title>Auto Industry: केंद्र सरकार की &#8216;CAFE 2027&#8217; नियमों में ढील देने की तैयारी, ऑटो सेक्टर को मिलेगी बड़ी राहत</title>
		<link>https://uditvani.in/crime/jamshedpur-crime/india-government-to-relax-cafe-2027-auto-industry-norms/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 08:28:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Auto Industry]]></category>
		<category><![CDATA[CAFE Norms]]></category>
		<category><![CDATA[Electric Vehicles]]></category>
		<category><![CDATA[Emission Standards]]></category>
		<category><![CDATA[Fuel Efficiency]]></category>
		<category><![CDATA[Hybrid Cars.]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Government]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली: भारत सरकार घरेलू ऑटो इंडस्ट्री को बड़ी राहत देने के लिए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) नियमों में ढील देने की योजना बना रही है. एनडीटीवी प्रॉफिट की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार वर्ष 2027 से 2032 की अवधि के लिए निर्धारित कठोर उत्सर्जन लक्ष्यों को थोड़ा नरम कर सकती है. [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी, नई दिल्ली: </strong></span>भारत सरकार घरेलू ऑटो इंडस्ट्री को बड़ी राहत देने के लिए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) नियमों में ढील देने की योजना बना रही है. एनडीटीवी प्रॉफिट की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार वर्ष 2027 से 2032 की अवधि के लिए निर्धारित कठोर उत्सर्जन लक्ष्यों को थोड़ा नरम कर सकती है.</p>
<p>CAFE नियम ऐसे मानक हैं, जिनके तहत किसी वाहन निर्माता कंपनी (OEM) द्वारा एक वित्त वर्ष में बेची गई सभी यात्री कारों की औसत ईंधन खपत और CO₂ उत्सर्जन का आकलन किया जाता है. इसका मकसद ईंधन की बचत, तेल आयात पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण घटाना है.</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे सख्त नियम</strong></span><br />
ऊर्जा मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) द्वारा तैयार किए गए संशोधित ड्राफ्ट में सरकार ने एक साथ कठोर लक्ष्य थोपने के बजाय &#8216;चरणबद्ध दृष्टिकोण&#8217; अपनाया है. इस प्रस्ताव में अनुपालन का दायरा कम करने का प्रावधान किया गया है, जिससे भारी वाहनों को पहले मिलने वाला अतिरिक्त लाभ अब कम हो जाएगा. गौरतलब है कि कैफे 2027, भारत की फ्लीट-स्तरीय ईंधन अर्थव्यवस्था रोड मैप का तीसरा चरण है, जिसका उद्देश्य ऑटोमोबाइल सेक्टर को देश के जलवायु लक्ष्यों के साथ जोड़ना है.</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>उत्सर्जन लक्ष्यों में किया गया बदलाव</strong></span><br />
कैफे 2027 के नए ड्राफ्ट में सितंबर 2025 के पुराने ड्राफ्ट की तुलना में नियमों को काफी लचीला बनाया गया है. उत्सर्जन वक्र (Emission Curve) को एक नए ढलान सूत्र (Slope Formula) के साथ समायोजित किया गया है. इसे वित्त वर्ष 2028 में 0.00158 निर्धारित किया गया है, जो वित्त वर्ष 2032 तक घटकर 0.00131 हो जाएगा. इस बदलाव से पहले के प्रस्ताव की तुलना में ईंधन की खपत थोड़ी अधिक होने की अनुमति मिल सकेगी.</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए &#8216;सुपर क्रेडिट&#8217;</strong></span><br />
ड्राफ्ट में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए &#8216;सुपर क्रेडिट&#8217; का प्रावधान शामिल है. इसके तहत फ्लीट-स्तर के उत्सर्जन की गणना करते समय एक इलेक्ट्रिक वाहन को कई वाहनों के बराबर गिना जा सकेगा. प्लग-इन हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल हाइब्रिड वाहनों को उच्च गुणक (Higher Multipliers) मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, कार निर्माताओं के बीच &#8216;क्रेडिट ट्रेडिंग&#8217; की भी अनुमति दी गई है, जिससे कंपनियों को नियमों का पालन करने में आसानी होगी.</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>जुर्माना और छोटे निर्माताओं को छूट</strong></span><br />
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि नियमों का पालन न करने पर बड़े निर्माताओं पर करोड़ों रुपये का भारी जुर्माना लग सकता है. हालांकि, छोटे पैमाने के निर्माताओं को बड़ी राहत दी गई है; प्रति वर्ष 1,000 से कम यूनिट का उत्पादन करने वाले विशिष्ट निर्माताओं को इन अनुपालन आवश्यकताओं से पूरी तरह छूट दी गई है.</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>किन वाहनों पर लागू होते CAFE नियम ?</strong></span><br />
भारत में CAFE नियम 3500 किलोग्राम से कम ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) वाली यात्री कारों पर लागू होते हैं. इसमें पेट्रोल, डीजल, CNG, LPG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारें शामिल हैं.</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>कैसे तय होता है अनुपालन?</strong></span><br />
यह नियम किसी एक कार मॉडल पर नहीं, बल्कि कंपनी के पूरे बेड़े (fleet) पर लागू होता है.<br />
कंपनी की सभी कारों की बिक्री के आधार पर औसत निकाला जाता है.<br />
हर मॉडल की लैब टेस्टिंग से तय फ्यूल एफिशिएंसी/CO₂ डेटा लिया जाता है.<br />
फिर पूरी कंपनी का सालाना औसत तय लक्ष्य से मिलाया जाता है.<br />
अगर औसत तय सीमा से ज्यादा है, तो कंपनी को तकनीक सुधारनी पड़ती है या कम उत्सर्जन वाले वाहन बढ़ाने पड़ते हैं.</p>
<p>भारत में CAFE के चरण<br />
CAFE-I (2017–2022)<br />
लक्ष्य: 130 ग्राम CO₂/किमी<br />
CAFE-II (2022–2027)<br />
लक्ष्य: 113 ग्राम CO₂/किमी<br />
CAFE-III (प्रस्तावित: अप्रैल 2027 से)<br />
मसौदा लक्ष्य: लगभग 91.7 ग्राम CO₂/किमी<br />
CAFE-IV (प्रस्तावित: 2032 के बाद)<br />
मसौदा लक्ष्य: लगभग 70 ग्राम CO₂/किमी</p>
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