
उदित वाणी, चक्रधरपुर : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर स्थित आदिवासी बालक छात्रावास में शुक्रवार दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब एक बड़ी दुर्घटना उस वक्त टल गई जब छात्रावास भवन पर आसमानी बिजली गिर गई. सौ से अधिक छात्र किसी प्रकार सुरक्षित रहे, लेकिन छात्रावास की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई.
कोई हताहत नहीं, लेकिन दहशत गहराई
जिस समय बिजली गिरी, उस समय अधिकांश छात्र बाहर कार्य कर रहे थे. बिजली गिरने की आवाज और दीवार क्षतिग्रस्त होने की घटना से छात्र भयभीत हो गए. गनीमत रही कि कोई भी छात्र घायल नहीं हुआ, लेकिन छात्रावास परिसर में डर का माहौल है.
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
छात्रों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब छात्रावास भवन पर बिजली गिरी हो. इससे पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन हर बार संबंधित प्रशासन ने इसे नज़रअंदाज़ किया है.
क्यों नहीं लगाया गया तड़ित चालक?
छात्रों और स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार तड़ित चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) लगाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. छात्रों ने साफ शब्दों में कहा कि यदि सुरक्षा के लिए तड़ित चालक नहीं लगाया गया, तो वे छात्रावास छोड़ने को मजबूर होंगे.
क्या जागेगा अब प्रशासन?
यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि आखिर सुरक्षा जैसे बुनियादी विषयों पर लापरवाही क्यों बरती जा रही है. क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही ज़िम्मेदार जागेंगे?

