
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटानगर स्टेशन पर रविवार को रेल यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी एक्सप्रेस कई महीनों से अपने निर्धारित समय से चार घंटे से अधिक की देरी से चल रही है. लंबी प्रतीक्षा के बाद रेलवे ने ट्रेन को टाटानगर में ही रद्द करने की घोषणा कर दी. सूचना मिलते ही सैकड़ों यात्री प्लेटफॉर्म पर फंस गए और आगे की यात्रा को लेकर असमंजस में दिखे. कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें न तो समय पर स्पष्ट जानकारी मिली और न ही वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में उचित मार्गदर्शन.
होली के मद्देनज़र चलाई गई स्पेशल ट्रेनें
टाटानगर-एर्नाकुलम होली स्पेशल भी तीन घंटे की देरी से रवाना हुई. भीड़ कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई इस स्पेशल ट्रेन में एसी श्रेणी की अधिकांश सीटें खाली नजर आईं, जो चर्चा का विषय बनी रही. आम तौर पर त्योहारों के मौसम में ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट रहती है, लेकिन यहां उल्टा दृश्य दिखा. यात्रियों कहना है कि या तो सेवा का पर्याप्त प्रचार नहीं हुआ या फिर समय की अनिश्चितता के कारण यात्रियों ने अन्य विकल्प चुन लिए.
रविवार को टाटानगर आने वाली कई प्रमुख ट्रेनें भी घंटों लेट रहीं. इनमें साउथ बिहार एक्सप्रेस (आरा–दुर्ग), इस्पात एक्सप्रेस (हावड़ा–टिटलागढ़), गीतांजलि एक्सप्रेस (मुंबई–हावड़ा), अहमदाबाद–हावड़ा एक्सप्रेस और बक्सर–बिलासपुर एक्सप्रेस शामिल रहीं. ट्रेनों के अनिश्चित समय ने प्लेटफॉर्मों पर भीड़ बढ़ा दी, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
यात्रियों का कहना है कि “स्पेशल ट्रेन” का उद्देश्य तभी सार्थक है जब वह समय पर चले और भरोसेमंद सूचना उपलब्ध कराए. वहीं, जनशताब्दी जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन का अचानक रद्द होना रेलवे के परिचालन प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है. यात्रियों ने बेहतर समन्वय, समयबद्ध संचालन और रीयल-टाइम सूचना प्रणाली मजबूत करने की मांग की है.

