
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटानगर स्थित इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर के सभागार में टाटानगर रेल सिविल डिफेंस द्वारा बेसिक लाइफ सपोर्ट, सीपीआर, एफबीएओ यानी बाहरी वस्तु से वायु मार्ग अवरोध की स्थिति में प्राथमिक उपचार तथा फायर फाइटिंग की विधि पर विस्तृत प्रशिक्षण व मॉक ड्रिल आयोजित की गई. इस प्रशिक्षण में दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर, रांची, आद्रा और खड़गपुर मंडल के लगभग 300 लोको पायलट शामिल हुए.
सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने बताया कि ट्रेन दुर्घटना के दौरान अंग कटे हुए, बेहोश यात्री या पेसमेकर लगे व्यक्ति को सीपीआर नहीं देना चाहिए. उन्होंने सीपीआर देने से पहले की प्राथमिक जांच विधि, सांस व हृदय की धड़कन बंद होने की स्थिति में तुरंत ‘सी-चेक, कॉल और केयर’ के सिद्धांत पर कार्य करने की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर अचानक हृदय गति रुकने, बिजली के करंट, दिल का दौरा या सांस रुकने जैसी स्थिति में ‘गोल्डन आवर’ के भीतर सीपीआर दिया जाना जीवन रक्षक साबित हो सकता है. एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सीपीआर देने की अलग पद्धति भी प्रशिक्षित की गई.
वायु मार्ग में विदेशी वस्तु फंसने की स्थिति में हेइमलिच मैनूवर तकनीक का लाइव मॉक ड्रिल कर प्रदर्शन किया गया. साथ ही घायलों को सुरक्षित तरीके से प्राथमिक उपचार देने की विधि समझाई गई.
कार्यक्रम के दूसरे चरण में लोको ट्रेनिंग सेंटर परिसर में सिविल डिफेंस डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह ने फायर संयंत्र के उपयोग की विधि, एहतियात और एलपीजी गैस लीक से लगी आग को बुझाने की प्रक्रिया का मॉक ड्रिल द्वारा प्रदर्शन किया. नव प्रशिक्षित महिला डेमोंस्ट्रेटर तेजिता कुमारी ने घायल अंग पर संक्रमण रोकने हेतु सही तरीके से बैंडेज करने तथा सीपीआर की लाइव डेमोंस्ट्रेशन दी.
कार्यक्रम के अंत में लोको पायलट प्रशिक्षण केंद्र के प्रिंसिपल ने सिविल डिफेंस की ओर से लगातार उन्नत तकनीक और नए विषयों पर आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण देने की सराहना की और इसे रेल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया.

