
उदित वाणी, रांची : केंद्रीय ऊर्जा, आवास और शहरी विकास मंत्री तथा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण [जी राम जी] अधिनियम मांग आधारित नहीं, बल्कि आवश्यकता आधारित योजनाओं पर केंद्रित है और योजनाओं को भ्रष्टाचार मुक्त करने की दिशा में आधुनिक तकनीक का उपयोग अनिवार्य किया गया है. राज्यों की भागीदारी बढ़ाकर जिम्मेवारी बढ़ाई गई है.
गांव, गरीब, मजदूर, किसान के हित जी राम जी अधिनियम है. उन्होंने कहा कि अधिनियम को लेकर कांग्रेस व विपक्षी पार्टियों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है. केन्द्रीय मंत्री अधिनियम को लेकर भाजपा द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यशाला को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करने के बाद प्रेसवार्ता को भी संबोधित किया. उन्होंने कहा कि यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सतत विकास का साधन बनाने वाला व विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप है. उन्होंने कहा कि कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था, भ्रष्टाचार और विकास उन्मुख दृष्टिकोण की कमी के कारण मनरेगा का दीर्घकालिक प्रभाव कमजोर होता चला गया.
काम के आवंटन की मांग आधारित प्रणाली खुली हुई थी. जिसके कारण वित्तीय असंतुलन पैदा होता था. मांग आधारित व्यवस्था के कारण कई बार अधिकारियों को आवश्यक योजनाओं का सृजन करना पड़ता था. जिसमें सरकारी धन और श्रम दोनों की बर्बादी होती थी. जबकि अब अधिनियम में विकसित भारत के संकल्पों को उतारने के लिए गांव की आवश्यकता के अनुरूप योजनाओं की स्वीकृति का प्रावधान किया गया है. अब ग्रामीण कार्यों की योजना विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से बनाई जाएगी तथा ब्लॉक जिला और राज्य स्तर पर समेकित किया जाएगा.
बार्षिक रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है. केवल काम के दिन ही नहीं बढ़ाए गए, बल्कि मजदूरों को शीघ्र परिश्रमिक मिलने का प्रावधान भी किया गया है. रोजगार नहीं मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी किया गया है. उन्होंने कहा कि आवश्यकता अनुरूप योजनाओं के निर्माण को चार श्रेणियां में विभाजित किया गया है. जिसमें जल सुरक्षा, प्रबंधन, कोर ग्रामीण अवसंरचना निर्माण, आजीविका से संबंधित संरचना निर्माण तथा मौसम के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का सृजन किया जायेगा. जिससे समन्वित राष्ट्रीय विकास को गति मिलेगी.
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कांग्रेस की सरकार से ज्यादा रूपये मनरेगा में खर्च किया. महिलाओं की भागीदारी 56.74 प्रतिशत तक बढ़ाई गई.आधार सीडेड सक्रिय श्रमिक 76 लाख से 12.11 करोड़ तक बढ़ाया गया. लेकिन डिजिटल टैगिंग नहीं होने के कारण गबन जारी रहा. झारखंड, पश्चिम बंगाल, पंजाब जैसे राज्यों की ऑडिट रिपोर्ट ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर हुए. लेकिन अब नए अधिनियम में एआई आधारित निगरानी, केंद्र-राज्य स्तरीय संचालन समितियां, पंचायतों की निगरानी, जीपीएस आधारित निगरानी, योजनाओं का साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण जैसे प्रावधान किया गया है. वहीं भाजपा द्वारा 15, 16 और 17 जनवरी को अधिनियम को लेकर सभी जिलों में भी कार्यशाला आयोजित किया जायेगा.

