
उदित वाणी, नई दिल्ली : पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को एक और बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले में ट्रायल पर रोक लगाने की उनकी याचिका को खारिज कर दिया है.
हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
लालू प्रसाद यादव की ओर से पहले दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मुकदमे पर रोक लगाने की मांग की गई थी. हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
न्यायमूर्ति एम.एस. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले में सुनवाई की. याचिका में दलील दी गई थी कि यह मामला बहुत पुराना है और सीबीआई ने 2021 में एफआईआर दर्ज की, जबकि कथित घटनाएं 2005 से 2009 के बीच की हैं, जब लालू यादव रेल मंत्री थे.
कपिल सिब्बल ने दी दलीलें, फिर भी नहीं मिला स्थगन
लालू यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की. उन्होंने अदालत को बताया कि यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और इसमें देरी से कार्रवाई की गई.
हालांकि कोर्ट ने यह दलील मानने से इनकार कर दिया और ट्रायल जारी रखने की अनुमति दे दी.
क्या है ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला?
यह मामला उस वक्त का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे. आरोप है कि रेल में नौकरी दिलवाने के बदले कई लोगों से जमीन ली गई. सीबीआई ने इस घोटाले में 2021 में प्राथमिकी दर्ज की थी. अब इस मामले में कोर्ट में विधिवत सुनवाई चलेगी.

