उदित वाणी, नई दिल्ली: ताप विद्युत संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति पहले नई कोयला वितरण नीति (एनसीडीपी), 2007 के तहत की जाती थी. 2017 में इस नीति को शक्ति नीति द्वारा प्रतिस्थापित किया गया, जिसके तहत कोयला आपूर्ति अब कोल कंपनियों और विद्युत संयंत्रों के बीच निष्पादित ईंधन आपूर्ति समझौतों (एफएसए) के वाणिज्यिक शर्तों के अनुसार की जाती है. सरकार ने 2022 में निर्णय लिया कि विद्युत क्षेत्र के सभी मौजूदा लिंकेज धारकों की पूर्ण विद्युत खरीद समझौते की आवश्यकता पूरी करने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) द्वारा तय ट्रिगर और वार्षिक अनुबंधित मात्रा (एसीक्यू) के स्तर पर ध्यान दिए बिना कोयला उपलब्ध कराया जाएगा. इसके अलावा, कोल कंपनियां सिंगल विंडो ई-नीलामी के तहत कोयला बेचती हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताएं पूरी की जाती हैं.
कोयला आपूर्ति की प्रक्रिया और मूल्य निर्धारण
एफएसए के तहत कोयला आपूर्ति की प्रक्रिया में कोयले का मूल्य निर्धारण वाणिज्यिक शर्तों और समय-समय पर जारी मूल्य अधिसूचनाओं के अनुसार होता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि विद्युत संयंत्रों को सही मूल्य पर पर्याप्त कोयला मिलता है, ताकि बिजली उत्पादन निरंतर जारी रहे.
कोयला उत्पादन में वृद्धि
देश में कोयला उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है. 2023-24 में अब तक का सबसे अधिक 997.826 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन हुआ. मौजूदा वर्ष 2024-25 में फरवरी तक कोयला उत्पादन में 5.45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 929.15 मिलियन टन तक पहुंच गया है.
सरकार द्वारा उठाए गए कदम
सरकार द्वारा कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं:
1. कोयला ब्लॉकों के विकास में तेजी – कोयला मंत्रालय नियमित रूप से कोयला ब्लॉकों के विकास की समीक्षा करता है.
2. एमएमडीआर अधिनियम, 2021 – इस अधिनियम के तहत कैप्टिव खान मालिकों को अपने वार्षिक खनिज उत्पादन का 50 प्रतिशत तक खुले बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है.
3. सिंगल विंडो मंजूरी पोर्टल – कोयला खदानों के शीघ्र संचालन के लिए एकल खिड़की मंजूरी पोर्टल की सुविधा प्रदान की गई है.
4. वाणिज्यिक खनन योजना – वाणिज्यिक खनन को बढ़ावा देने के लिए नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता और छूट दी गई है.
कोयला कंपनियों द्वारा उठाए गए कदम
कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) ने भी कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं. CIL ने भूमिगत खदानों में उच्च उत्पादन तकनीक अपनाई है, जबकि SCCL ने नई परियोजनाओं की ग्राउंडिंग और मौजूदा परियोजनाओं के संचालन के लिए कदम उठाए हैं.
इन कदमों के माध्यम से, सरकार घरेलू कोयला उत्पादन और आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है. इन प्रयासों से विद्युत क्षेत्र को विश्वसनीय घरेलू कोयला आपूर्ति मिल रही है, जिससे बिजली उत्पादन की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और देश में कोयला संकट का समाधान हो रहा है.
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