
उदित वाणी, जमशेदपुर: अगर मन में सच्ची लगन हो तो दिव्यांगता कभी आड़े नहीं आती बल्कि वह अपनी इच्छाशक्ति से उस मुकाम को हासिल कर लेता है जो आम आदमी का भी एक सपना होता है.
ऐसे ही जादूगोड़ा के राजदोहा गांव के एक दिव्यांग बुजुर्ग आदमी है जिसने अपनी कला का डंका पूरे भारत में बजा दिया है अब उन्हें अपनी कला के लिये राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया जाएगा.
बता दे कि राजदोहा गांव निवाशी स्वर्गीय कस्तूरी मुर्मू के मझले बेटे 67 वर्षीय दिव्यांग दुर्गा प्रसाद मुर्मू को उनके कला व संगीत के लिये संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार वर्ष ( 2019, 2020, 2021) के लिए चुना गया है. बता दे कि इसकी घोषणा संगीत नाटक अकादेमी, नयी दिल्ली के सचिव एपी राजन ने की.
हालांकि इस अकादेमी की ओर से पूरे देश भर में कुल 128 लोगो का नाम चुना गया है. जिसमे पूर्वी सिंहभूम जिला से संगीतकार व लेखक दुर्गा प्रसाद मुर्मू का नाम भी शामिल है. हालांकि उनको राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किये जाने की खबर से क्षेत्र में खुशी की लहर है उन्हें बधाई देने वालो की तांते लग रही है.
क्या कहते है दुर्गा प्रसाद मुर्मू
संगीत नाटक अकादेमी पुरुस्कार के लिये उनका नाम चुने जाने पर वे बेहद खुश है. उनका कहना है कि उनकी इस सफलता के पीछे उनकी पत्नी मायनो मुर्मू को श्रेय जाता है.
मुर्मू ने उन्हें हर एक मुसीबत में उनके साथ खड़ा रही है और मेरी दिव्यांगता को मेरी कमजोरी बनने नही दी. कहा कि मेरी पहली पत्नी नागी मुर्मू का 1981 में देहांत हो गया था जिसके बाद वे 1984 में वे दूसरी शादी किये और उनके दो बेटी है जिनका शादी हो चुकी है जिसमे बड़ी बेटी बिंदु मुर्मू और छोटी बेटी मंजू मुर्मू है.
कैसा रहा इस पुरुस्कार तक पहुचने का सफर
वही इस पुरस्कार तक पहुँचने तक के बारे में जन्होने बताया कि क्षेत्र में वे लगातार अपनी संगीत से लोगो को दिल जीतने लगे जिससे कि और उनका हौसला मजबूत होता गया जिससे वे गाने के साथ किताब भी लिखनी सुरु कर दिये.
वही अबतक लगभक 200 गाने लिख चुके है. वही इस पुरस्कार तक पहुचने में बाबुलाल बोइपोई द्वारा उनका हर सफर पर काफी सहयोग किया गया एवं उन्ही के द्वारा इसकी जानकारी भी मुझे दिया गया था. जिसके बाद उनके साथ रांची के संगीत नाट्य अकादमी में जलकर अपनी सारी कागजात को जमा किये.
जिसके बाद सभी को रांची से नयी दिल्ली भेजा गया था एवं शनिवार को उन्हें मालूम हुआ कि इस पुरस्कार के लिये उनका नाम चुना गया है. वही यह खबर सुनते ही खुशी से उनका और उनकी पत्नी की आंख भर आयी.
कई राज्यो में अबतक किये है अपना कला का प्रस्तुत
दुर्गा प्रसाद मुर्मू ने कहा वे अबतक अलग अलग संथाली कार्यक्रम में बंगाल, झारखण्ड, ओडिसा एवं नेपाल तक जाकर अपनी संगीत की जादू बिखेरा चुके है. जहाँ लोगो द्वारा उनके संगीत को अब भी पसंद किया जाता है. जिसके लिए उनके कई पुरस्कार भी मिल चुका है.
जिसमे से रांची के धुर्वा में वर्ष 2022 में 1 से 10 जुलाई तक चलने वाली जगन्नाथ मोहत्सव में सांस्कृतिक कार्य निर्देशालय, पर्यटन, कला संस्कृति खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग, झारखण्ड सरकार एवं वर्ष 2018 में टाटा मोटर्स लिमिटेड की ओर से अलंकार अवार्ड से भी नवाजे जा चुके है.
संगीत संस्था व स्कूल भी चलते है दुर्गा प्रसाद
जानकारी के अनुसार बता दे कि पिछले 20 वर्षो से दुर्गा प्रसाद द्वारा संगीत की एक संस्था चला रहे है. जिसके कई बच्चो को संगीत सिखाया जाता है.
कहा कि यह संगीत का कॉर्स 6 महीने का है. वही हाड़थोपा चौक में हिहिडी-पीपीडी शिशु निकेतन के नाम से प्रचलित इंग्लिश मीडियम स्कूल का भी संचालन करते है जिसमे कक्षा 1-5 तक कि पढ़ाई जाती है. साथ ही भुरका इपिल ऑल इतुन नाम से मुर्गाघुटु में एक संथाली स्कूल के शिक्षक है जहाँ वे छोटे बच्चो को अपने संस्कृति, ऑल चिकि और सामाजिक व्यवस्था से संबंधित बच्चो को पढ़ाई करवाते है.

