
उदित वाणी, चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित सभागार में बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (रबी 2024-25) की जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति (DLMC) की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक की अध्यक्षता जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त चंदन कुमार ने की। बैठक का उद्देश्य बीमित किसानों की गुणवत्ता जांच के आँकड़ों की पुष्टि करना था।
बीमा आंकड़ों का लेखा-जोखा
एचडीएफसी-ईआरजीओ (HDFC ERGO) कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा बताया गया कि इस योजना के अंतर्गत कुल 2494 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें बीमित क्षेत्रफल 2140.89 हेक्टेयर दर्ज किया गया है।
विभिन्न फसलों के अनुसार आँकड़े इस प्रकार हैं:
चना: 466 आवेदन, 488.48 हे. बीमित
सरसों/राई: 205 आवेदन, 126.67 हे. बीमित
आलू: 608 आवेदन, 504.30 हे. बीमित
गेहूं: 1215 आवेदन, 1021.44 हे. बीमित
बुआई बनाम बीमित क्षेत्र: बड़ी असमानता उजागर
जिले में बुआई और बीमा के आंकड़ों के बीच भारी अंतर देखा गया:
चना: कुल बुआई क्षेत्र 10,543 हे., बीमित मात्र 488.48 हे. (4.63%)
सरसों-राई: बुआई 12,370 हे., बीमित 126.67 हे. (1.02%)
गेहूं: बुआई 5,486 हे., बीमित 1021.44 हे. (18.61%)
आलू फसल का अच्छादन प्रतिवेदन अनुपलब्ध रहा, जिस पर उपायुक्त ने जिला कृषि पदाधिकारी को रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और निर्देश
बैठक के दौरान उपायुक्त चंदन कुमार ने इस बात पर चिंता जताई कि बुआई क्षेत्र की तुलना में बीमित क्षेत्र बहुत कम है। उन्होंने यह भी कहा कि बीमा योजना की सफलता तभी मानी जाएगी जब अधिकतम किसान इससे लाभान्वित हों। आलू की फसल से संबंधित अनुपलब्ध आंकड़ों पर भी नाराजगी जताते हुए उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि संबंधित रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाए, ताकि समुचित निगरानी और योजना का मूल्यांकन किया जा सके। बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, राज्य सहकारी बैंक के प्रतिनिधि, जिला सहकारिता पदाधिकारी एवं एचडीएफसी-ईआरजीओ के जिला प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

