
उदित वाणी, धनबाद: बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद में स्व. बिनोद बिहारी महतो की प्रतिमा के अनावरण समारोह में राज्यपाल-सह-राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति ने अपने गहन विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल एक प्रतिमा के अनावरण का नहीं, बल्कि विचार और आत्मगौरव की पुनः प्रतिष्ठा का है.
समाज सुधारक के जीवन से प्रेरणा लें युवा
राज्यपाल ने कहा कि बिनोद बिहारी महतो जी ने शिक्षा, श्रम और आत्मसम्मान की दिशा में जो कार्य किया, वह आज भी हमारे लिए पथप्रदर्शक है. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कठिनाइयों में भी आत्मबल और समर्पण के साथ बड़ा परिवर्तन संभव है.
विश्वविद्यालय का उद्देश्य हो संवाद और सहभागिता
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि छात्रहित सर्वोपरि हो. विश्वविद्यालयों को चाहिये कि छात्र समस्याओं को गंभीरता से लें, संवाद को बढ़ावा दें और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाएं. केवल डिग्री नहीं, उत्कृष्टता को लक्ष्य बनाना होगा.
विश्वविद्यालयों की स्थिति पर चिंता, लेकिन प्रतिबद्धता भी जताई
राज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि वे वर्तमान में राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं. लेकिन सुधार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. कुलपति व प्रतिकुलपतियों की नियुक्तियाँ समयबद्ध तरीके से की जा रही हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि नवनियुक्त अधिकारी दायित्व का निर्वहन ईमानदारी से करेंगे.
मुख्यमंत्री से की विशेष अपील
राज्यपाल ने मंच से मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उच्च शिक्षा को मजबूती देने हेतु झारखंड लोक सेवा आयोग को आवश्यक निर्देश दिए जाएं. विश्वविद्यालयों में शिक्षकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियाँ शीघ्र होनी चाहिए, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता सुदृढ़ हो.
हर दायित्व को समझे समाज: तभी होगा सुधार
राज्यपाल ने कहा कि जब विद्यार्थी पढ़ाई पर, शिक्षक अध्यापन पर और प्रशासन समन्वय पर ध्यान देगा, तभी एक सशक्त शिक्षण वातावरण तैयार होगा. उन्होंने टीम भावना से कार्य करने की अपील की.
झारखंड की युवा शक्ति ही है असली संपदा
राज्यपाल ने कहा कि यह भूमि खनिज से समृद्ध है, पर इससे भी बढ़कर यहाँ की युवा शक्ति है. उसे यदि सही दिशा और प्रेरणा मिले, तो यह राज्य ज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भरता का केंद्र बन सकता है.
शोध हो मौलिक, समाज से जुड़ा
उन्होंने शोध और नवाचार पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिससे विद्यार्थी दूसरे राज्यों की ओर न भागें, बल्कि अन्य राज्य के छात्र झारखंड में पढ़ने आएं.
शिक्षा में हो उद्योग से जुड़ाव
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में प्रभावी कैम्पस प्लेसमेंट सेल की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि शिक्षकों को प्रेरक भूमिका निभानी चाहिए और परिसर का वातावरण नवाचारोन्मुख, स्वच्छ और निर्भीक हो.
“विकसित भारत @2047” की दिशा में विश्वविद्यालय निभाएं अग्रणी भूमिका
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को इसमें नेतृत्वकारी भूमिका निभानी होगी. यह शिक्षा, नवाचार और आत्मनिर्भरता पर आधारित मिशन है.
चरित्र निर्माण और सामाजिक चेतना के केंद्र बनें विश्वविद्यालय
अपने संदेश के अंत में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल इमारतों से नहीं, छात्रों की सोच और शोध की गुणवत्ता से पहचाने जाते हैं. उन्होंने सभी को आह्वान किया कि वे मिलकर झारखंड को एक सशक्त एजुकेशन हब बनाएं.

