
उदित वाणी, रांची : झारखंड स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 में राज्यस्तरीय कटऑफ मार्क्स से ज्यादा अंक पाने के बावजूद शिक्षक पद पर नियुक्ति नहीं किये जाने को लेकर दायर 259 याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में लगातार दूसरे दिन भी सुनवाई हुई. वहीं हाइकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने दूसरे दिन मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. साथ ही अदालत ने सभी पक्षों को लिखित रूप से भी पक्ष करने का निर्देश दिया है.
गौरतलब है कि प्रार्थी मीना कुमारी व अन्य की ओर से 259 अलग-अलग याचिकाएं दायर कर अदालत से राज्यस्तरीय कटऑफ मार्क्स से ज्यादा अंक पानेनेवाले अभ्यर्थियों की शिक्षक के पद पर नियुक्ति का आग्रह किया गया है. जेएसएससी ने बर्ष 2016 में हाईस्कूल शिक्षक के 17572 पदों पर नियुक्ति के लिए प्रक्रिया शुरू की थी तथा अदालत के आदेश के बाद जेएसएससी ने 26 बिषयों का राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट तथा कट ऑफ भी जारी किया था.
नियुक्ति संबंधी जारी विज्ञापन में भी राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट के आधार पर शिक्षकों का चयन करने की बात कही गई थी. परंतु बाद में जिला स्तरीय मेरिट लिस्ट के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई और जिलों में राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट से कम अंक प्राप्त करनेवालों की नियुक्ति कर दी गई तथा रिक्तियां लगभग खत्म हो गई. जिसके कारण सैकड़ों वैसे अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं हो पायी है, जिन्होंने राज्यस्तरीय कट ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किया है. प्रार्थियों द्वारा इस मामले में एक न्यायिक आयोग गठित करने और वस्तुस्थिति की जांच कर रिपोर्ट मंगाने का भी आग्रह किया गया है.
प्रार्थियों का कहना है कि मेरिट लिस्ट तैयार करने में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है. लिस्ट में काफी त्रुटियां है. वहीं राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए महाधिवक्ता राजीव रंजन ने मामले में न्यायिक आयोग गठित करने का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि सरकार के पास सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेज मौजूद हैं. ऐसे में सभी अभ्यर्थी अपना-अपना आवेदन आयोग में दे और आयोग द्वारा उनका सत्यापन करते हुए निर्णय लिया जायेगा. सुनवाई के दौरान जेएसएससी के पदाधिकारी भी अदालत में मौजूद थे.
