
उदित वाणी, कोलाबीरा : सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है. जंगल से भटके हुए हाथी अब निडर होकर गांवों और कस्बों में घूमते नजर आ रहे हैं. इससे ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है, जबकि वन विभाग इस पूरे घटनाक्रम पर मौन साधे हुए है.
अवैध खनन से उजड़ा हाथियों का घर, वन विभाग असहाय
स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों का मानना है कि अवैध खनन और जंगलों की कटाई के चलते हाथियों का प्राकृतिक आवास खत्म हो रहा है. इससे हाथी भोजन और शरण की तलाश में मानव बस्तियों की ओर बढ़ने लगे हैं. वन विभाग संसाधनों की कमी के कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहा है.
क्यों हो रहा है हाथियों का व्यवहार आक्रामक?
हाथी प्राचीन समय से अत्यंत बुद्धिमान प्राणी माने जाते हैं. लेकिन इन दिनों उनका व्यवहार असामान्य और आक्रामक देखा जा रहा है. विशेषज्ञ बताते हैं कि हाथियों की दृष्टि कमजोर होती है और उनका आकार बहुत बड़ा होता है, जिससे वे सामने आने वाली किसी भी वस्तु को खतरे के रूप में देख लेते हैं. इसी भ्रम में वे कई बार मनुष्यों पर हमला कर देते हैं.
झुंड से बिछड़ने वाले हाथी होते हैं सबसे खतरनाक
जंगली हाथी सामूहिक जीवन जीते हैं और आमतौर पर झुंड में चलते हैं. हर झुंड में एक नेतृत्वकर्ता होता है जिसके निर्देशों पर पूरा समूह चलता है. लेकिन यदि कोई हाथी झुंड से बिछड़ जाता है, तो वह अक्सर आक्रोशित और हिंसक हो जाता है. ऐसा हाथी वापस झुंड में नहीं लिया जाता और वह आजीवन अकेला रह जाता है. यह अलगाव उसे और भी ज्यादा खतरनाक बना देता है.

