
उदित वाणी, रांची : जिले के मुरी ओपी क्षेत्र के मारदू गांव में बुधवार को एक हैरतअंगेज घटना सामने आई. गांव के पूरन चंद्र महतो के घर में एक बाघ घुस गया. बाघ के घर में घुसने की खबर से पूरे गांव में अफरातफरी व दहशत का माहौल बन गया. इसकी सूचना मिलने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर रांची एसडीओ द्वारा तत्काल पूरन चंद्र महतो के आवासीय परिसर से 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू कर दिया गया. इधर इसकी खबर फैलते ही आसपास से काफी संख्या में ग्रामीण पूरन चंद्र महतो के घर के पास जुट गए. देखते ही देखते घर के बाहर लोगों की काफी भीड़ जमा हो गई थी. सूचना पाकर प्रखंड प्रमुख जितेंद्र बड़ाइक, कोचो पंचायत के मुखिया, गांव के वार्ड सदस्य, वन विभाग के वनरक्षी एवं ओपी पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंचे.
इसके अलावा वन विभाग की टीम और बेतला नेशनल पार्क की बिशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचे. बाघ को ट्रैंकुलाइज यबेहोश करने वाला इंजेक्शनद्ध देकर रेस्क्यू किया गया. डीएफओ श्रीकांत के मुताबिक यह बाघ संभवतः मेल बंगाल टाइगर है और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया क्षेत्र से भटककर यहां आया. वनरक्षक गौतम बोस ने बताया कि सुबह 5.30 बजे उन्हें इसकी सूचना मिली थी. बाघ के पगमार्क देखने के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई थी और वनरक्षी जय प्रकाश साहु एवं गौतम बोस ने रांची वन विभाग के अधिकारी एवं रेस्क्यू टीम को इसकी सूचना दी. इसके बाद बाघ को शाम में सफलता पूर्वक पिंजरे में पकड़ लिया गया. बताया गया कि मेडिकल जांच के बाद बाघ को रांची के बिरसा जैविक उद्यान में रखा जाएगा तथा बिरसा जू में दो दिन रखने के बाद उसे बेतला टाइगर रिजर्व ले जाया जा सकता है.
घटना के संबंध में बताया गया कि बुधवार अहले सुबह 4.30 बजे पुरन चंद्र महतो की पुत्री सनिका कुमारी बकरी बांधने अपने घर से बाहर निकली थी. उसी समय एक बाघ कमरे में घुस गया और छिप कर बैठ गया. इसी बीच पूरन चंद्र महतो को जब अपने घर के कमरे में कुछ आहट सुनाई दी, तो उन्होंने टॉर्च की रोशनी में जो देखा. उससे उसकी सांसें थम गई. पूरन चंद्र ने देखा कि एक बाघ उनके कमरे में आराम से बैठा था. लेकिन सबसे हैरत की बात यह थी कि उसी कमरे में दो बच्चियां सो रही थीं और बाघ ने बच्चों को छुआ तक नहीं. पूरन चंद्र ने शोर मचाये बिना व बगैर हड़बड़ी दिखाये साहस व होशयारी से बच्चियों को बाहर निकाला और सूझबूझ के साथ कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया तथा वन विभाग को सूचना दी. बाघ के रेस्क्यू किये जाने के बाद पूरन चंद्र महतो ठंढे दिमाग और बहादुरी की सभी लोग तारीफ करने लगे. बताया गया कि पूरन चंद्र के इस साहस को एक मिसाल के तौर पर देखा जाना चाहिए.

