
उदित वाणी, रांची : झारखंड में जीएसटी व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं और सुधारों को लेकर एसोसिएशन ऑफ स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एशिया) ने रांची में आयोजित GST ग्रिवांस रिड्रेसल कमिटी की बैठक में हिस्सा लिया और मुख्य आयुक्त सेन्ट्रल जीएसटी श्री प्रदीप सक्सेना को विस्तृत ज्ञापन सौंपा.
एशिया की ओर से उपाध्यक्ष संतोख सिंह, सचिव दिव्यांशु सिंहा और ट्रस्टी राजीव रंजन श्रीवास्तव ने इस बैठक में संगठन का पक्ष रखा और व्यापारिक वर्ग की समस्याओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया.
ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया गया —
1. अपीलीय न्यायाधिकरण का अभाव : समाधान कब?
एशिया ने स्पष्ट किया कि जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण का कार्य नहीं करना व्यापारियों के लिए गंभीर समस्या है. किसी भी अपील के खारिज होने पर सीधे उच्च न्यायालय जाना पड़ता है, जो अत्यधिक खर्चीला और समय-साध्य है. सुझाव दिया गया कि न्यायाधिकरण की अनुपलब्धता की स्थिति में क्षेत्राधिकार आयुक्त को सूचना देने की एक स्पष्ट प्रक्रिया तय की जाए और अपील के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए.
2. ऑडिट प्रक्रिया में संतुलन जरूरी
विभाग द्वारा करदाताओं को 5 वर्षों तक के दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के लिए नोटिस दिए जाते हैं, जिसके बाद धारा 74 के तहत कठोर कार्रवाई की जाती है. एशिया का कहना है कि ये सभी मामले धारा 73 के तहत सामान्य प्रक्रिया में निपटाए जाने चाहिए, जब तक कर छिपाने या धोखाधड़ी का कोई ठोस प्रमाण न हो.
3. क्या गलत GST भुगतान पर राहत नहीं मिलनी चाहिए?
जब गलती से CGST/SGST की जगह IGST या इसके विपरीत कर जमा हो जाता है, तो करदाता को नया कर जमा कर पुराने की रिफंड के लिए आवेदन करना पड़ता है. यह व्यवस्था समय व ऊर्जा की बर्बादी है. सुझाव है कि ऐसे मामलों में स्व-समायोजन की सुविधा दी जाए.
4. रिफंड प्रक्रिया हो सरल और सहज
निर्यातकों को इनपुट और इनपुट सेवा पर ITC रिफंड के लिए मामूली तकनीकी कारणों से परेशान होना पड़ता है. एशिया ने रिफंड प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाने की मांग की.
5. GST दरों का युक्तिकरण हो, आम जनता को राहत मिले
दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे साबुन, क्रीम, मूवी टिकट और बिजली के सामान पर वर्तमान में अधिक जीएसटी दरें लागू हैं. एशिया ने सुझाव दिया कि अधिकतम दर 18% तक सीमित हो, और केवल कुछ खास वस्तुएं ही 28% स्लैब में रहें.
6. पूर्व-जमा राशि की रिफंड प्रक्रिया हो स्वचालित
फिलहाल पूर्व-जमा राशि के रिफंड के लिए करदाता को RFD-01 फॉर्म भरना होता है. संगठन ने सुझाव दिया कि जब मामला करदाता के पक्ष में समाप्त हो जाए और विभाग अपील न करे, तो राशि की स्वत: वापसी सुनिश्चित की जाए.
7. ASMT-12 का अनुपालन हो सुनिश्चित
जब करदाता GST ASMT-10 में नोटिस का जवाब ASMT-11 में देते हैं, तो उन्हें अक्सर ASMT-12 स्वीकृति आदेश प्राप्त नहीं होता. यह पारदर्शिता में बाधक है और इसे दुरुस्त करने की आवश्यकता है.
8. ITC सत्यापन की सुविधा जरूरी
करदाताओं के पास कोई ऐसा माध्यम नहीं है जिससे वे जान सकें कि GSTR-2A/2B में दिखाया गया ITC असली विक्रेता से है या किसी फर्जी फर्म से. सरकार को यह सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए ताकि करदाता धोखे से बच सकें.
9. छोटे कारोबारियों को मिले रियायत
देश की अधिकांश अर्थव्यवस्था छोटे व्यापारियों पर निर्भर है, जो सीमित संसाधनों के साथ कार्य करते हैं. 10 करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले करदाताओं को तिमाही रिटर्न दाखिल करने की सुविधा दी जानी चाहिए और उनके लिए सरल प्रक्रियाएं लागू की जानी चाहिए.

