
उदित वाणी, जमशेदपुर : सीआईआई ने रांची में “रूटेड इन हेरिटेज, राइजिंग इन एंटरप्राइज” थीम पर सीआईआई झारखंड ट्राइबल एंटरप्रेन्योरशिप समिट का आयोजन किया. इस समिट का मुख्य उद्देश्य वित्त, बाजार, कौशल और तकनीक संबंधी ज्ञान तक पहुंच बढ़ाकर आदिवासी नेतृत्व वाली विकास प्रक्रिया को तेज करना था. समिट में पूरे पूर्वी भारत से आदिवासी उद्यमी, उद्योग जगत के नेता, नीति-निर्माता, वित्तीय संस्थान, शिक्षाविद् तथा विकास एजेंसियां एकत्र हुईं और आदिवासी उद्यमियों की लचीलापन, वित्तीय योजनाओं एवं स्कीमों की जानकारी, बाजार तैयारता तथा इकोसिस्टम मजबूती पर सार्थक संवाद का मजबूत मंच तैयार हुआ. समिट ने आदिवासी उद्यमिता को पोषित करने, अवसरों का विस्तार करने तथा आदिवासी समुदायों को क्षेत्र के आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनाने की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.सीआईआई झारखंड स्टेट काउंसिल के पूर्व चेयरमैन एवं हाइको इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक तापस साहू ने कहा कि झारखंड अपनी समृद्ध आदिवासी संस्कृति और विरासत के साथ आदिवासी उद्यमिता के लिए अपार अवसर प्रदान करता है.
जीडीपी में योगदान दे रहे आदिवासी उद्यमी
झारखंड सरकार के श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के सचिव जितेंद्र कुमार सिंह ने उद्यमिता को बढ़ावा देने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि आदिवासी उद्यमी देश के जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि 26 फीसदी आदिवासी आबादी विभिन्न व्यापारिक गतिविधियों में संलग्न है और समावेशी विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है. राज्य में 171 आईटीआई, 781 अतिरिक्त आईटीआई, 333 पीपीपी सेंटर, 6 सीएसआर समर्थित संस्थान और 260 से अधिक निजी आईटीआई हैं जो 30-35 क्षेत्रों में 9,000 सीटें उपलब्ध कराते हैं. उन्होंने जेएसडीएमएस के तहत 2015 से चल रहे निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उल्लेख किया तथा उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाने और नए कोर्स शुरू करने की चल रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला.
पीएम-एफएमई योजना का 10 फीसदी लाभ आदिवासी समुदाय को
झारखंड इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (जियाडा) के प्रबंध निदेशक प्रेम रंजन ने कहा कि कुछ विकासात्मक पहलुओं में आदिवासी समुदाय अन्य समुदायों के बराबर हैं. उन्होंने पीएम-एफएमई योजना का जिक्र करते हुए बताया कि इसका लगभग 10 फीसदी लाभ आदिवासी समुदायों को मिल रहा है. उन्होंने सभी संबंधित योजनाओं को एक व्यापक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) में संकलित करने के महत्व पर बल दिया. ट्राइबल इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के राष्ट्रीय महासचिव बसंत तिर्की ने एमएसएमई एवं आदिवासी समुदायों की समावेशी आर्थिक वृद्धि में जबरदस्त संभावनाएं बताईं. उन्होंने प्रक्रियाओं को सरल बनाने, जागरूकता बढ़ाने तथा कारोबार में आसानी पर जोर दिया. तिर्की ने स्किल बोर्ड और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के साथ सहयोग कर भुगतान चक्र को सुगम बनाने की बात कही. आदिवासी कला-शिल्प की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया. एएसआर मेटलर्जी प्राइवेट लिमिटेड के एमडी एवं सीईओ असीम कंडुलना ने कहा कि यह समिट आदिवासी पारंपरिक ताकत और उभरते आर्थिक अवसरों का सार्थक संगम है. आदिवासी उद्यमी अपनी अनुकूलन क्षमता और गहरी जड़ों वाली नवोन्मेष संस्कृति के कारण औद्योगिक इकोसिस्टम में अनूठा मूल्य जोड़ते हैं.
सत्र में इन्होंने विचार रखें
यशवंत कुमार सिंह (लीड-स्किलिंग एंड एंटरप्रेन्योरशिप, टाटा स्टील फाउंडेशन), सुमन सौरभ साहू (डीजीएम, नाबार्ड), डॉ. सौरव स्नेहव्रत (एसोसिएट प्रोफेसर, एक्सएलआरआई), अनीशेश मिश्रा एवं पंकज कुमार (कंसल्टेंट एवं टीम लीड, ग्रांट थॉर्नटन भारत), मयंक मुरारी (हेड सीएसआर, उषा मार्टिन लि), जयश्री चौधरी (हेड-कॉन्ट्रैक्ट्स एंड मटेरियल्स, मैथन पावर लि.), तौसीफ इकबाल (एडीएम-एचआर एंड आईआर, जेकेपीसीपीएल), प्रो. गौरव मराठे (एसिस्टेंट प्रोफेसर, आईआईएम रांची), पूनम मधु तांबा (फाउंडर, गो ट्रैवल्स), रवि कांत तिर्की (को-फाउंडर एंड डायरेक्टर, ट्राइबल मैट्रिमोनी सर्विसेज प्रा. लि.), नागिश्री मार्डी (तिरला गावता आजीविका महिला समिति), मोनिट बुट कुमार (फील्ड सुपरवाइजर, उषा मार्टिन फाउंडेशन), रविराज मुर्मू (निर्देशक एवं फाउंडर, सावंता स्टूडियोज) तथा कपिल टोप्पो (फाउंडर, मंडी एड्डपा).
210 उद्यमी भाग लिए
सीआईआई झारखंड ट्राइबल एंटरप्रेन्योरशिप समिट में 210 से अधिक आदिवासी उद्यमी, सामुदायिक नेता, नीति-निर्माता, वित्तीय संस्थान एवं उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए. समिट में 10 आदिवासी उद्यमियों द्वारा प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसमें उनके उत्पाद, नवोन्मेष एवं उद्यम क्षमता को व्यापक दर्शकों के सामने प्रदर्शित किया गया.कैटेलाइजिंग ट्राइबल इनोवेशन: फाइनेंसिंग मैकेनिज्म फॉर नेक्स्ट जेनरेशन लीडर्स, “ब्रेकिंग बैरियर्स फॉर ट्राइबल एंटरप्रेन्योर्स” तथा “स्किलिंग फॉर स्केल: बिल्डिंग टुमारोज ट्राइबल बिजनेस लीडर्स” जैसे केंद्रित सत्रों के माध्यम से समिट ने आदिवासी उद्यमों को आगे बढ़ाने का व्यापक मार्ग प्रशस्त किया.

