
उदित वाणी, रांची : राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया और लालू की मुश्किलें बढ़ सकती है. अदालत ने सीबीआई द्वारा बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में लालू प्रसाद की सजा बढ़ाने की आग्रह को लेकर दायर याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश रंगोन मुखोपाध्याय और न्यायाधीश अंबुज नाथ की खंडपीठ ने सीबीआई की दलीलों को सुनने के बाद याचिका स्वीकार की है. सीबीआई द्वारा हाईकोर्ट में चारा घोटाले के तहत देवघर कोषागार से 89 लाख रुपये की अवैध निकासी के मामले में दोषी ठहराए गए लालू प्रसाद समेत छह लोगों की सजा बढ़ाने का आग्रह करते हुए याचिका दायर की गई है.
यद्यपि इनमें से तीन सजायाफता की मृत्यु हो चुकी है. जबकि शेष तीन में लालू प्रसाद यादव, बेक जूलियस और सुधीर कुमार भट्टाचार्य शामिल हैं. इन तीनों को देवघर कोषागार से अवैध निकासी मामले में निचली अदालत द्वारा प्रत्येक को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई है. निचली अदालत के आदेश को अपर्याप्त मानते हुए सीबीआई द्वारा सजायाफता लालू प्रसाद समेत अन्य को अधिकतम सजा देने का आग्रह करते हुए हाईकोर्ट में अपील याचिका दायर की गई है. सीबीआई की दलील में कहा गया है कि जब इसी मामले में लोक लेखा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा को सात साल की सजा दी गई है, तो लालू यादव को भी समान रूप से अधिकतम सजा मिलनी चाहिए. जबकि सीबीआई की बिशेष अदालत के न्यायाधीश शिवपाल सिंह द्वारा 6 जनवरी 2018 को ही लालू यादव समेत छह लोगों को उक्त सजा सुनाई गई है.
लालू यादव के अलावा मामले में बेक जूलियस, आरके राणा, फूलचंद सिंह, महेश प्रसाद और सुबीर भट्टाचार्य को भी मामले में सजा के साथ जुर्माना लगाया गया है. वर्तमान में लालू यादव जमानत पर हैं. चारा घोटाला से जुड़े कई मामलों में अदालत द्वारा उन्हें सजा सुनाई गई है. लेकिन जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के रिम्स और फिर दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया था. उनकी दोनों किडनियां फेल होने के बाद इलाज के लिए उन्हें सिंगापुर ले जाया गया था. जहां उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने उन्हें किडनी डोनेट की और किडनी प्रत्यार्पण करने के बाद से लालू यादव पटना में रह रहे है.
