
उदित वाणी, रांची : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रामगढ़ के आफताब अंसारी की मौत पर बखेडा खड़ा करनेवाले हेमंत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डा इरफान अंसारी को आड़े हाथों लिया और डा अंसारी की मेडिकल डिग्री पर भी सवाल खड़ा किया. इसके साथ ही मरांडी ने मामले में हेमंत सरकार पर तृष्टिकरण का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि समुदाय बिशेष के बलात्कारी की मौत पर हेमंत सरकार 3 लाख मुआवजा देती है और कांवरियों की मौत पर 1 लाख रूपये देने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि यह सरकार तृष्टिकरण में कितना डूबी है. यह इसके सभी निर्णयों में साफ-साफ झलकता है.
वहीं मरांडी ने कहा कि आफताब अंसारी की मौत के मामले मेें इस सरकार की पोल खुल गई है. स्वास्थ्य मंत्री द्वारा आफताब अंसारी की मौत को मॉब लिंचिंग बताया जा रहा था. जबकि उन्हीं के विभाग ने पोस्टमार्टम कर मौत को पानी में डूबने से बताया है. अब तो स्वास्थ्य मंत्री की डिग्री भी संदेह के घेरे में है. लेकिन दुर्भाग्यजनक स्थिति यह है कि इसके बावजूद स्वास्थ्य मंत्री ने वोट बैंक के लिए सब कुछ ताक पर रखते हुए आफताब के परिजनों को तीन लाख मुआवजा देने की घोषणा की है और बाबा बैद्यनाथ की पूजा कर लौट रहे कावंरियों की दुर्घटना में मौत होने पर इस सरकार ने मात्र एक-एक लाख रुपए मुआवजा की घोषणा की है. इससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार की नजरों में एक कांवरिया का कितना महत्व है.
बड़बोले स्वास्थ्य मंत्री से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश नहीं
इधर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि समय पर वेतन का भुगतान न होने के कारण एम्बुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हुए हैं. हर जगह मरीज़ परेशान हैं. परंतु सरकार को कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा है. स्वास्थ्य मंत्री तो पहले ही कह चुके हैं कि खाट पर मरीज़ों को अस्पताल ले जाना आम बात है. उन्होंने कहा कि इन बातों से लगता है कि बड़ बोले स्वास्थ्य मंत्री से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश नहीं है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे प्रगतिशील एवं अति संवेदनशील व्यक्ति को स्वास्थ्य मंत्री का पद प्राप्त होगा, तो झारखंडवासी सुचारू स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद किससे करेंगे.
