उदित वाणी, रांची: भारत सरकार द्वारा हाल ही में पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025, आदिवासी समुदायों की भूमि की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है. इस विधेयक के तहत अनुसूची 5 और 6 में शामिल आदिवासी भूमि को वक्फ संपत्ति घोषित करने से रोकने का प्रावधान किया गया है, जिससे बाहरी हस्तक्षेप पर लगाम लगेगी.
आदिवासी भूमि, राष्ट्रीय धरोहर और आम नागरिकों की संपत्ति होगी संरक्षित
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा, “अब किसी की भी भूमि मात्र घोषणा से वक्फ नहीं बनेगी. पुरातत्व विभाग की भूमि को भी सुरक्षा मिलेगी, अनुसूची 5 और 6 के तहत आदिवासी क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे, और आम नागरिकों की निजी संपत्ति को भी संरक्षण प्राप्त होगा.”
इस विधेयक के पारित होने से झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसे आदिवासी समुदायों की भूमि को अतिक्रमण से बचाने वाला कदम बताया. उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा विधेयक के विरोध की आलोचना करते हुए कहा कि “झामुमो आदिवासियों के हित में लाए जा रहे किसी भी कानून के साथ नहीं खड़ा होता, बल्कि अपने राजनीतिक फायदे के लिए अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नीति अपनाता है.”
झामुमो के विरोध पर उठे सवाल
झामुमो द्वारा वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध किए जाने को लेकर सियासत गरमा गई है. रमेश हांसदा ने झामुमो पर निशाना साधते हुए कहा कि “यह विधेयक स्पष्ट रूप से कहता है कि अनुसूचित क्षेत्रों की जमीन को वक्फ में कभी शामिल नहीं किया जा सकता. यह आदिवासियों के लिए एक बड़ा उपहार है, लेकिन झामुमो का इस पर विरोध यह दर्शाता है कि उन्हें आदिवासी हितों से कोई मतलब नहीं है.”
राष्ट्रीय धरोहरों की सुरक्षा भी होगी सुनिश्चित
यह विधेयक पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारकों और क्षेत्रों को वक्फ संपत्ति घोषित करने से भी रोकता है, जिससे राष्ट्रीय धरोहरों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी.
सरकार के इस विधेयक के पारित होने से आदिवासी समुदायों की भूमि और सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है, जिससे उनकी संपत्ति और अधिकारों की रक्षा संभव हो सकेगी.
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