
नई दिल्ली: मुंबई 26/11 आतंकी हमले के आरोपी पाकिस्तानी-कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा ने दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत में एक बार फिर याचिका दायर की है, जिसमें उसने जेल से अपने परिवार के सदस्यों से फोन पर बात करने की अनुमति मांगी है। यह याचिका मंगलवार को दाखिल की गई है और अदालत बुधवार को इस पर सुनवाई कर सकती है। राणा का कहना है कि उसके परिजन उसकी स्थिति को लेकर चिंतित हैं और उनसे संपर्क करना बेहद जरूरी है।
पिछली याचिका हो चुकी है खारिज
इससे पहले 24 अप्रैल को भी राणा ने ऐसा ही अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। उस समय एनआईए ने कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया था कि राणा ऐसी बातचीत के माध्यम से महत्वपूर्ण जानकारियाँ लीक कर सकता है, जो सुरक्षा के लिए खतरा हो सकती हैं।
प्रत्यर्पण के बाद जारी है जांच प्रक्रिया
गौरतलब है कि तहव्वुर राणा, जो पाकिस्तानी सेना के मेडिकल कोर का पूर्व अधिकारी है, को हाल ही में अमेरिका से भारत प्रत्यर्पित किया गया है। उस पर 26/11 हमलों में शामिल होने का आरोप है, जिनमें 166 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। 9 मई को अदालत ने उसे 6 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जिससे फिलहाल एनआईए की रिमांड स्थगित हो गई है।
आवाज़ और हस्तलिपि के नमूने लिए गए
3 मई को एनआईए ने अदालत की उपस्थिति में राणा की आवाज़ और हस्तलिपि के नमूने एकत्र किए थे, ताकि उन्हें डेविड कोलमेन हेडली के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग और लिखित नोट्स से मिलाया जा सके। एनआईए को शक है कि राणा ने हेडली को लिखित निर्देश और नक्शे दिए थे, जिनका इस्तेमाल हमले के लक्ष्यों की रेकी के लिए किया गया।
राणा ने खारिज किया हमले से संबंध
पूछताछ में राणा ने यह दावा किया कि उसका 26/11 हमलों की योजना या निष्पादन से कोई लेना-देना नहीं है। उसने हेडली को ही इस सबका जिम्मेदार बताया और कहा कि वह सिर्फ उसका बचपन का दोस्त है। राणा ने स्वीकार किया कि वह मुंबई, दिल्ली और केरल गया था, लेकिन केरल यात्रा को उसने एक परिचित से मुलाकात के उद्देश्य से बताया। उसने उस व्यक्ति का नाम और पता भी एजेंसी को उपलब्ध कराया है।
हेडली बना था सरकारी गवाह
राणा का सह-आरोपी डेविड कोलमेन हेडली, जो फिलहाल अमेरिका की जेल में बंद है, पहले ही सरकारी गवाह बन चुका है और उसने माना है कि वह लश्कर-ए-तैयबा के लिए भारत में टोही मिशन चला रहा था।
(IANS)

