
उदित वाणी रांची/दुमका: राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (National Medical Commission-NMC) ने देश के सात मेडिकल कॉलेजों पर एमबीबीएस इंटर्न और पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड भुगतान और उसकी जानकारी सार्वजनिक न करने के मामले में कड़ी कार्रवाई की है. आयोग ने इन सभी संस्थानों पर एक–एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. इन संस्थानों में झारखंड का दुमका मेडिकल कॉलेज भी शामिल है.
NMC के अंडर–ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (UGMEB) द्वारा 12 मार्च 2026 को जारी सार्वजनिक नोटिस में कहा गया है कि मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को अपने आधिकारिक वेबसाइट पर एमबीबीएस इंटर्न और पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट को दिए जाने वाले स्टाइपेंड की जानकारी सार्वजनिक करना और उसका नियमित भुगतान सुनिश्चित करना अनिवार्य है. यह निर्देश सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और NMC के नियमों के अनुरूप जारी किए गए थे.
आयोग के अनुसार, पर्याप्त समय और कई बार याद दिलाने के बावजूद कुछ संस्थानों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया. प्राप्त आंकड़ों की जांच के बाद यह पाया गया कि सात मेडिकल कॉलेजों ने इंटर्न और पीजी रेजिडेंट को स्टाइपेंड भुगतान से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई. इसे NMC के निर्देशों और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम 2019 के तहत निर्धारित नियमों का उल्लंघन माना गया है.
NMC ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए प्रत्येक संस्थान पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में भी निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ प्रवेश पर रोक, अनुमति निलंबन या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.
जिन मेडिकल कॉलेजों पर जुर्माना लगाया गया है, वे हैं:
- दुमका मेडिकल कॉलेज, दिग्घी, दुमका – झारखंड
- आकाश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर, देवनहल्ली, बेंगलुरु – कर्नाटक
- गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, बाड़मेर – राजस्थान
- गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, ओंगोल (पूर्व में राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) – आंध्र प्रदेश
- आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, जतखेड़ी, भोपाल – मध्य प्रदेश
- प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ – उत्तर प्रदेश
- पं. बी.डी. शर्मा पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रोहतक – हरियाणा
आयोग ने कहा है कि इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को समय पर स्टाइपेंड भुगतान सुनिश्चित करना मेडिकल संस्थानों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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