
उदित वाणी, रांची : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री कृष्णानंद त्रिपाठी बुरे फंसे. उनके अपने ही दो अंगरक्षकों ने मारपीट और गाली-गलौज करने के आरोप में बुधवार को प्राथमिकी दर्ज करायी है. मेदिनीनगर के टाउन थाना में एससी-एसटी एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत जीरो एफआईआर दर्ज की गई है. इसके बाद मामले में जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस पदाधिकारी को दी गई है. थाना प्रभारी ज्योतिलाल रजवार ने इसकी पुष्टि की है. पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी पर अपने बॉडीगार्ड को थप्पड़ मारने और जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल करने का आरोप लगा है. दोनों बॉडीगार्ड ने पुलिस को लिखे आवेदन में कहा कि मंगलवार को पूर्व मंत्री डालटनगंज से लातेहार के लिए रवाना हुए थे. लातेहार की जुबली चौक पर जाम लगा था. जिसे पूर्व मंत्री ने हटाने का आदेश दिया था. जाम हटाने के क्रम में कुछ देर बाद पूर्व मंत्री उनके पास पहुंचे और जाति सूचक शब्द का इस्तेमाल करते हुए उन्हें थप्पड़ जड़ दिया. इसके बाद वे दोनों लातेहार थाने चले गए. जहां लातेहार एसडीपीओ की मौजूदगी में अल्कोहल टेस्ट भी किया गया. वहीं दोनों जवान बुधवार को मेदिनीनगर टाउन थाना पहुंचे और एफआईआर के लिए आवेदन दिया.
जवानों के समर्थन में उतरा झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन
इधर मामले में झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन ने डीजीपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है. एसोसिएशन की टीम ने पलामू में दोनों अंगरक्षकों से बातचीत की और उनके बयान के आधार पर ही प्राथमिकी दर्ज करायी गई है. एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कर्ण कुमार सिंह ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर बताया कि 2 सितंबर को पूर्व मंत्री ने अपने प्रतिनियुक्त अंगरक्षक आरक्षी-632 रवीन्द्र रिखियासन और आरक्षी-592 गोपाल सिंह के साथ सड़क पर गाड़ी रोककर अभद्र व्यवहार और मारपीट की. पत्र में कहा गया कि यह घटना सुरक्षा ड्यूटी पर लगे पुलिसकर्मियों की गरिमा और मनोबल को ठेस पहुंचाने वाली है. एसोसिएशन ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात पुलिस जवानों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है. साथ ही एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी को बचाने की कोशिश की गई, तो इसके खिलाफ भी आंदोलन किया जाएगा.
पूर्व मंत्री ने अपने जान की खतरा का जताया अंदेशा, सीएम से मांगी सुरक्षा
उधर पूर्व मंत्री के एन त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर अपने जान पर खतरे की गहरी आशंका जतायी है. उन्होंने अपने पत्र में खतरे के इस आशंका के पीछे जिला पुलिस अधीक्षक के साथ संबंधों में खटास को एक बड़ा कारण बताया है. उन्होंने अपनी सुरक्षा सुविधा में की गई कटौती को लेकर पलामू जिला पुलिस अधीक्षक से वाद-विवाद होने की बात कही है. उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि 2 सितम्बर को उन्हें प्राप्त सुरक्षाकर्मियों ने साथ में जाने से इंकार कर दिया. इसकी सूचना उन्होंने तत्काल पलामू पुलिस अधीक्षक, लातेहार पुलिस अधीक्षक और डीआईजी पलामू को दी. परन्तु कोई वैकल्पिक सुरक्षागार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया और उन्हें अकेले ही रांची आना पड़ा. इसके साथ ही त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री से मामले की समुचित जांच कराकर उचित कारवाई करने और उनकी सुरक्षा के लिए यथाशीघ्र 2-4 सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने के लिए आदेश देने का आग्रह किया है.
