
उदित वाणी, रांची : झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 ध्वनिमत से पारित किया गया. विश्वविद्यालय के नये अधिनियम में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में व्यवस्थागत आमूलचूल परिवर्तन होंगे. नये अधिनियम के तहत जहां विश्वविद्याालयों में राज्यपाल सह कुलाधिपति के अधिकारों को सीमित कर दिया गया है. वहीं विश्वविद्यालयों में कई नये पदों के सृजन की भी व्यवस्था की गई है. विभागीय मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सदन में इस विधेयक को पेश किया. उन्होंने इसके साथ ही उच्च व तकनीकी शिक्षा को लेकर कुल तीन विधेयक सदन में पेश किया. इस विधेयक के अलावा उन्होंने झारखंड कोचिंग सेंटर नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025 तथा झारखंड व्यवसायिक शिक्षण संस्थान शुल्क विनियमन विधेयक 2025 भी सदन में पेश किया. जिसे भी ध्वनिमत से पारित किया गया. राज्य में अब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के मंत्री विश्वविद्यालयों के प्रति कुलाधिपति होंगे.
प्रति कुलाधिपति ही विश्वविद्यालयों के सीनेट के भी अध्यक्ष होंगे और सीनेट की बैठकों की अध्यक्षता करेंगे. यद्यपि कुलाधिपति राज्यपाल ही रहेंगे. लेकिन राज्यपाल सह कुलाधिपति के अधिकार अब सीमित होंगे. परंतु राज्यपाल अब विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति नही ंकर पायेंगे. कुलपतियों की नियुक्ति अब राज्यपाल की जगह यूजीसी द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा की जाएगी. कुलपतियों की नियुक्ति के लिए एक खोज समिति गठित की जायेगी. खोज समिति में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अपर सचिव, प्रधान सचिव या सचिव पदेन अध्यक्ष होंगे. इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा नामित संसद के अधिनियम द्वारा स्थापित उच्च राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त संस्था या विश्वविद्यालय के निदेशक या प्रमुख, यूजीसी का प्रतिनिधि और कुलाधिपति द्वारा नामित प्रतिष्ठित शिक्षाविद प्रतिनिधि खोज समिति के सदस्य होंगे.
खोज समिति में संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलसचिव सदस्य सचिव होंगे. लेकिन उन्हें वोटिंग अधिकार नहीं होगा. खोज समिति द्वारा कुलपतियों और प्रति कुलपतियों के नामों का पैनल तैयार करते समय अगर सदस्यों के बीच मतैक्य नहीं होने पर समिति के अध्यक्ष को निर्णायक मत देने का अधिकार होगा. यदि राज्य सरकार अनुशंसित व्यक्तियों में से किसी को भी अनुमोदित नहीं करती है, तो वह फिर से समिति को पैनल भेजने का निर्देश दे सकती है. कुलपति के चयन की प्रक्रिया रिक्ति से छह माह पूर्व प्रारंभ की जाएगी. आवेदन के समय कुलपति के लिए अभ्यर्थी की आयु 65 बर्ष से अधिक नहीं होगी. कुलपति का कार्यकाल तीन बर्षों के लिए होगा. कुलपति के अलावा अन्य प्रशासनिक पदों समेत कई तरह के निदेशकों की नियुक्ति के लिए भी अधिनियम में व्यवस्था की गई है तथा कई तरह के विश्वविद्यालयों में कई तरह के बोर्डों व समितियों का भी गठन किया जायेगा. वहीं विश्वविद्यालयों के अध्यापकों, शिक्ष्केत्तर कर्मियों व प्रधानाचार्यों की नियुक्ति के लिए झारखंड राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग गठित किया जायेगा.
कोचिंग सेंटरों पर लगेगा लगाम, बनेगा नये कानून
छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामले, आग की घटनाओं, मूलभूत सुविधाओं की कमी के अलावा अनियमित ढंग से बढ़ते कोचिंग सेंटरों और अत्यधिक फीस वसूलने के अलावा कई अन्य तरह की विसंगतियों पर रोकथाम के लिए राज्य सरकार द्वारा झारखंड कोचिंग सेंटर कंट्रोल एंड रेगुलेशन बिल 2025 भी विधानसभा से पारित कराया गया. ऐसे सेंटर जहां 50 से अधिक छात्रों को स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर किसी भी अध्ययन कार्यक्रम या प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए शैक्षणिक सहायता के लिए कोचिंग प्रदान की जा रही है. इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन के लिए जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी कमेटी एवं राज्य स्तर पर झारखंड स्टेट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित किया जायेगा. जिसके तहत अब कोचिंग संस्थान खोलने के लिए ऑथारिटी के समक्ष रजिष्ट्रेशन कराना होगा.
विद्यार्थियों को सभी तरह की मूलभूत सुविधायें मुहैया कराने होंगे. लेटर ऑफ इंटेंट निर्गत होने की तिथि से 30 दिनों के अंदर पांच लाख रुपए की बैंक गारंटी जमा करनी होगी. फिर कमेटी द्वारा लेटर टू स्टार्ट की अनुमति दी जाएगी. कोचिंग सेंटर का पंजीकरण पांच बर्ष की अवधि के लिए मान्य होगा. अवधि समाप्त होने पर पंजीकरण का नवीकरण किया जा सकेगा. कोचिंग सेंटरों को वेब पोर्टल पर सारा डाटा रखना होगा. कोचिंग सेंटरों द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने पर पहली बार 5 लाख रुपए और दूसरी बार के लिए 10 लाख रुपए का दंड लगाया जा सकेगा. वित्तीय अनियमितता, कुप्रबंधन, कुप्रशासन की स्थिति पैदा होने पर कोचिंग संस्थान को पांच बर्षों के लिए ब्लैक लिस्टेड किया जा सकेगा. झारखंड स्टेट कोचिंग सेंटर रेगुलेटरी अथॉरिटी के अध्यक्ष जिला न्यायाधीश स्तर के सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी होंगे. कोचिंग सेंटरों को संचालित करने के क्रम में उत्पन्न विवादों के हल के लिए झारखंड राज्य कोचिंग सेंटर नियामक प्राधिकरण का भी गठन होगा. प्राधिकरण में सेवानिवृत न्यायिक पदाधिकारी जो प्रधान जिला न्यायाधीश के पद से अन्यून हो अध्यक्ष होंगे.
निजी संस्थान अब इंजीनियरिंग, मेडिकल व मैनेजमेंट समेत अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए नहीं ले पायेंगे मनमानी फीस
झारखंड में निजी संस्थानों द्वारा अब इंजीनियरिंग, मेडिकल व मैनेजमेंट समेत अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा इसको लेकर सभी तरह के व्यावसायिक पाठयक्रमों के लिए शुल्क विनियमन विधेयक की सदन से मंजूरी ली गई. इसके लिए राज्य सरकार द्वारा शुल्क विनियमन समिति गठिति की जायेगी. झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुशंसा पर रिटायर जज की अध्यक्षता में शुल्क निर्धारण समिति का गठन किया जायेगा. इस कमेटी में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा नामित राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय के कुलपति इसके उपाध्यक्ष होंगे. इनके अलावा अध्यक्ष द्वारा नामित एक प्रतिश्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट और अलग-अलग व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जुड़े लोग समिति में सदस्य बनाए जायेंगे. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य या कृषि विभाग के सचिव समिति के पदेन सचिव होंगे. शुल्क विनियमन समिति द्वारा संस्थानों में शुल्क में निगरानी रखेगी और शुल्क का निर्धारण भी करेगी.
समिति के अनुमोदन के बिना पठयक्रमों में प्रवेश के नाम पर शुल्क नहीं लिया जा सकेगा. इसके अलावा भी विधेयक में कई तरह की व्यवस्थायें की गई है. किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान द्वारा कैपिटेशन शुल्क वसूलने या मुनाफाखोरी की किसी भी शिकायत की जांच शुल्क विनियमन समिति द्वारा की जाएगी. यद्यपि शुल्क विनियमन समिति उस संस्थान के प्रबंधन को साक्ष्य और स्पष्टीकरण के लिए अवसर देने के बाद ही दंडात्मक कार्रवाई करेगी. अधिनियम के किसी भी नियम का उल्लंघन या किसी आदेश का अनुपालन नहीं होने के लिए दोषी पाए जाने पर समिति 20 लाख रुपए तक का दंडात्मक जुर्माना लगा सकती है.अधिरोपित कर सकती है. इससे निजी संस्थानों की मनमानी फीस वसूली से त्रस्त अभिभावकों को राहत मिलेगी.
