
उदित वाणी, छोटा नागरा : झारखण्ड सरकार ने मंगलवार को छोटा नागरा के धर्मगुट्टू फुटबॉल मैदान में सारण्डा वन क्षेत्र को वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित करने के मुद्दे पर जनसभा का आयोजन किया. इस सभा में 56 गाँवों के प्रतिनिधियों ने अपनी चिंताएँ और विचार व्यक्त किए. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में आयोजित इस सभा में सरकार ने जनता की भावनाओं को संकलित करने का वादा किया.
ग्रामीणों की चिंताएँ और माँगें
सभा में विभिन्न गाँवों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी. लगुड़ा देवगम मनकी ने कहा कि सेंक्चुरी बनने से पहले ग्रामीणों का संरक्षण और विकास सुनिश्चित होना चाहिए. रोआम निवासी रामो सिद्धू ने बताया कि खदानें जंगल, नदियों और नालों को बर्बाद कर रही हैं, लेकिन रोजगार नहीं दे रही हैं. पंचायत समिति सदस्य रामेश्वर चांपिया ने जोर देकर कहा कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना सेंक्चुरी का कोई औचित्य नहीं है.

मुखिया मंगल सिंह गिलुआ ने स्पष्ट किया कि यदि सेंक्चुरी से लाभ होगा तो समर्थन करेंगे, लेकिन आदिवासियों के अधिकारों और अस्तित्व से समझौता नहीं होगा. ग्रामीण बामिया माझी ने इसे केंद्र सरकार का दबाव बताया और कहा कि इससे आदिवासी अधिकार खत्म हो जाएँगे. अमर सिंह सिद्धू ने चेतावनी दी कि सेंक्चुरी बनने से आदिवासी परंपराएँ नष्ट हो जाएँगी. के.सी. हाइबुरु ने कहा कि सारण्डा में केवल मानकी-मुंडाओं का कानून चलेगा, बाहरी कानून लागू नहीं होगा.
सरकार का लोकतांत्रिक रुख
सभा की अध्यक्षता करते हुए मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा, “झारखण्ड सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का सम्मान करती है. हमारी सरकार जनता के हितों के लिए काम करती है और जनता सर्वोपरि है. सुप्रीम कोर्ट ने सारण्डा को वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित करने के निर्देश दिए हैं, और हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हमें यहाँ भेजा है ताकि हम जनभावनाओं को समझें और उनकी समस्याओं से अवगत हों.”
उन्होंने आगे कहा, “हम आपकी भावनाओं को सरकार तक पहुँचाएँगे. लोकतंत्र में जनता की सबसे बड़ी ताकत है, और हिंसक कदम उठाने की कोई जरूरत नहीं है. हम नियम-कानून के तहत आपकी माँगों को पूरा करने का प्रयास करेंगे.”

सभा में प्रमुख हस्तियाँ
राधाकृष्ण किशोर के साथ समिति के अन्य मंत्रियों—दीपक बिरुवा, चमरा लिंडा, संजय प्रसाद यादव और दीपिका पांडे सिंह—भी मौजूद थे. इसके अलावा सांसद जोबा माझी, विधायक सोनाराम सिंकू, निरल पूर्ति, सुखराम उरांव, जगत माझी, जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सोरेन, उपायुक्त चंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक अमित रेणु, और सारण्डा डीएफओ अभिरूप सिन्हा भी उपस्थित रहे.
विकास बनाम अधिकार
सारण्डा के घने जंगलों में आज विकास और आदिवासी अधिकारों के बीच तनाव स्पष्ट दिखाई दे रहा है. एक ओर वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत है, तो दूसरी ओर आदिवासियों की आजीविका और परंपरागत अधिकार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. झारखण्ड सरकार की विधानसभा स्तरीय समिति ने साफ कहा कि जनता की राय सर्वोपरि है.

