
उदित वाणी, रांची : सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल को वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी [ससांगदाबुरू संरक्षण रिजर्व] घोषित करने की दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी है. बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में इस बिषय पर चर्चा की गई और मामले में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से लाये गये प्रस्ताव के तहत मंत्रियों के समूह [ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स] गठित करने का निर्णय लिया गया. ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स में वित्त, खान व भूतत्व, वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन, भू राजस्व व कल्याण विभाग समेत कुल पांच मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है.
यद्यपि कैबिनेट की प्रधान सचिव वंदना दादेल ने बताया कि गुप ऑफ मिनिस्टर्स में कौन-कौन मंत्री शामिल होंगे इस संबंध में अधिसूचना जारी होने के बाद ही पता चल पायेगा. उन्होंने बताया कि मंत्रियों के समूह द्वारा मामले में असेसमेंट करने के बाद एक रिपोर्ट कैबिनेट को सौंपा जायेगा तथा मंत्री समूह की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार द्वारा सारंडा वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी घोषित करने के मामले में अंतिम निर्णय लिया जायेगा. मंत्री समूह द्वारा सारंडा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी घोषित करने के पहले सारंडा आरक्षित वन क्षेत्र के 57 हजार 590.41 हेक्टेयर [575.19 वर्ग किलोमीटर] क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले सारंडा वन प्रमंडल क्षेत्र के अंकुआ, समता, करमपदा, तिरिलपोशी, गुदलीवाद व थल्कोबाद समेत अन्य गांवों में रहनेवाले जनजातियों के आर्थिक व सामाजिक स्थिति तथा उस क्षेत्र में चल रही आर्थिक गतिविधियों का फील्ड असेसमेंट किया जायेगा.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार को आठ अक्टूबर तक सारंडा को वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी घोषित करने का आदेश दिया है और शीर्ष अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा है कि निर्धारित तिथि तक वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी घोषित नहीं किये जाने पर राज्य सरकार की मुख्यसचिव को जेल भेज दिया जायेगा. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद पूरे देश का ध्यान सारंडा वन क्षेत्र की ओर खींचा है. ज्ञात हो कि सारंडा वन क्षेत्र हरी-भरी वादियों के बीच 700 पहाड़ियों की गोद में बसा है. वहीं इस वन क्षेत्र में लौह अयस्क का विशाल भंडार भी है. सारंडा में लौह अयस्क लगभग 4 बिलियन टन का रिजर्व है.
यह एशिया का सबसे बड़ा मुख्यतया साल वृक्षों का जंगल है. औषधीय पौधों और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले वनस्पतियों की वजह से भी सारंडा लंबे समय से चर्चा में रहा है. बिशेषज्ञों का मानना है कि इससे जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा होगी. साथ ही खनिज संसाधनों का न्यायसंगत उपयोग भी सुनिश्चित होगा. एक अनुमान मुताबिक अगले 20-30 सालों में लौह अयस्क के खदानों से 25 लाख करोड़ रुपए मूल्य के लौह अयस्क निकाले जाने की उम्मीद है. जिससे राज्य सरकार को लगभग 5 लाख करोड़ रुपए बतौर रॉयल्टी मिलेगी. यही वजह है कि लौह अयस्क और उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी घोषित करने के पहले रिव्यू करने का निर्णय लिया गया है.

