
उदित वाणी, जमशेदपुर: रविवार, 15 दिसंबर 2024 से चाईबासा सहित पूरे झारखंड में 2024-25 सत्र के लिए धान अधिप्राप्ति योजना की शुरुआत हो गई है. चाईबासा में इस योजना का विधिवत शुभारंभ झारखंड सरकार के परिवहन मंत्री दीपक बिरूवा ने किया. पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर प्रखंड के चाईबासा लैंपस परिसर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मंत्री दीपक बिरूवा ने जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन और उपायुक्त कुलदीप चौधरी की मौजूदगी में इस योजना की शुरुआत की.
कार्यक्रम में भागीदार और योजना की विशेषताएँ
इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी संदीप अनुराग टोपनो, जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुनीला खलखो, मानकी-मुण्डा, मुखिया और कृषक उपस्थित थे. मंत्री दीपक बिरूवा ने लैंपस में धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया का जायजा लिया और धान विक्रय के लिए उपस्थित किसान सोमा पुरती को 50 प्रतिशत राशि का सांकेतिक चेक प्रदान किया, जो धान विक्रय के उपरांत वजन के आधार पर दी गई थी.

किसानों को लाभ और योजना की महत्ता
मंत्री दीपक बिरूवा ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाना है और इसी के तहत पूरे राज्य में लैंपस के माध्यम से धान अधिप्राप्ति कार्य की शुरुआत की गई है. उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों के लिए सही समय पर हो रही है और राज्य सरकार इस योजना को निरंतर बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है. उन्होंने किसानों से अपील की कि वे बिचौलियों से बचें और लैंपस में अपने धान का निबंधन करवाएं ताकि वे सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य का पूरा लाभ उठा सकें.
धान की कीमत और अधिप्राप्ति प्रक्रिया
सत्र 2024-25 के लिए सरकार ने साधारण धान के लिए प्रति क्विंटल 2300 रुपये और ए ग्रेड धान के लिए 2320 रुपये का समर्थन मूल्य तय किया है, इसके अलावा 100 रुपये प्रति क्विंटल का प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी. मंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसानों को सही समय पर उनकी फसल का मूल्य मिल सके.
लक्ष्य और प्रक्रिया
पश्चिमी सिंहभूम जिले का इस सत्र में कुल धान अधिप्राप्ति लक्ष्य 3 लाख क्विंटल निर्धारित किया गया है. जिले के 18 प्रखंडों में कुल 17 लैंपस का चयन किया गया है, जहाँ किसान अधिकतम 200 क्विंटल तक धान बेच सकते हैं. लैंपस में विक्रय किए गए धान के मूल्य का 50 प्रतिशत राशि 24 घंटे के भीतर किसानों के खातों में हस्तांतरित कर दी जाएगी.

