
उदित वाणी, रांची : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य में एमबीबीएस कोर्स में नामांकन प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर हुए अनियमितता का आरोप लगाया है और पूरे नामांकन को रद्द करते हुए पुनः काउन्सिलिंग कराने, अनियमितता में संलिप्त अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त करने एवं पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. नेता प्रतिपक्ष ने इस संबंध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर व्यापक ब्यौरा दिया है और बताया है कि यह बेहद गंभीर मामला है.
उन्होंने कहा कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों के नामांकन प्रक्रिया में झारखंड इंट्रेंस कॉम्पेटेटिव एक्जामिशन बोर्ड द्वारा शैक्षणिक सत्र 2025-26 में घोर अनियमितता बरती गई है. जिसके फलस्वरूप राज्य के विभिन्न श्रेणियों के योग्य एवं मेधावी अभ्यर्थी नामांकन कराने से वंचित रह गए हैं. उन्होंने अपने पत्र में कहा कि जेसीईसीईबी द्वारा भी स्वीकार किया गया है कि नामांकन प्रक्रिया में आरक्षित कोटि एवं अनारक्षित कोटि में अभ्यर्थियों के नामांकन में गड़बड़ियां हुई हैं एवं आरोपी अभ्यर्थियों के नामांकन को रोक दी गई है.
उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों ने आवेदन देकर नामांकन प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों की जांच की मांग की, तो स्वास्थ्य चिकित्सा विभाग द्वारा जेएमएचआईडीपीसीएल के प्रबंध निदेशक अबु इमरान की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई और नामांकन के लिए अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत जाति एवं आवासीय प्रमाणपत्रों की जांच किया गया. उन्होंने अपने जांच प्रतिवेदन में तीन अभ्यर्थियों सुश्री सुचारिता दास, सुश्री काजल व सुश्री भिवानी का जाति एवं निवासी प्रमाण पत्र गलत पाये जाने की रिपोर्ट दी. जिनका प्रमाण पत्र उपायुक्त गोड्डा एवं गिरिडीह द्वारा निर्गत किया था. साथ ही छह अभ्यर्थियों जिनका जसीेईसीईबी द्वारा मेडिकल कॉलेजों में नामांकन के लिए सीटें आवंटित कर दी गई थी. इनका भी जाति प्रमाणपत्र एवं निवासी प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से बना था.
जो राज्य से बाहर के रहनेवाले है. उन्होंने कहा कि जबकि जेसीईसीईबी द्वारा गड़बड़ी करने के लिए जानबूझकर एमसीसी के गाइडलाइन के अनुसार डाटा शेयरिंग नहीं की गई. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जांच कमिटी द्वारा प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए सभी अभ्यर्थियों तथा इस मामले में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की विस्तृत जांच किसी निष्पक्ष जांच एजेन्सी से कराए जाने की अनुशंसा भी की गई है. लेकिन विभाग द्वारा अभी तक जांच कराने का किसी तरह का निर्णय नहीं लिया गया है. इसके साथ ही मरांडी ने अबु इमरान कमिटी की जांच प्रतिवेदन की छाया प्रति भी संलग्न किया है.

