
उदित वाणी, रांची: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने महिला सुपरवाइजर की नियुक्ति को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई की और याचिका में उठाए गए संवैधानिक मामले को देखते हुए इसे चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया. अदालत ने खंडपीठ को याचिका स्थानांतरित करते हुए कहा कि महिलाओं के लिए कोई पद शत-प्रतिशत आरक्षित किया जा सकता है या नहीं, इसपर खंडपीठ द्वारा फैसला लिया जायेगा.
यद्यपि अदालत ने पूर्व में इस मामले में सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. इसके साथ ही अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया पर लगाई गई रोक को अगले आदेश तक जारी रखने का भी निर्देश दिया था. वहीं पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया था कि महिला सुपरवाइजर का पद केवल महिला कैडर के लिए ही सृजित किया गया है. क्योंकि यह पद लक्षित समूह जैसे गर्भवती महिलाएं और नवजात शिशु की माताओं से सीधा जुड़ा है.
उन्होंने कहा था कि महिला सुपरवाइजरों का कार्य महिलाओं से संबंधित होता है. इसलिए यह पद महिलाओं के लिए ही रखा गया है और देश के अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार की व्यवस्था है. जबकि मामले में प्रार्थी आकांक्षा कुमारी एवं अन्य की ओर से दलील दी गई थी कि किसी भी नियुक्ति में किसी वर्ग बिशेष को शत-प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. उनका कहना था कि इस भर्ती में केवल महिलाओं से ही आवेदन आमंत्रित किए गए हैं. जो संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है.
गौरतलब है कि जेएसएससी ने महिला एवं बाल विकास विभाग में महिला सुपरवाइजर के 421 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई है. याचिकाकर्ता भी इस परीक्षा में शामिल हुए थे. लेकिन जेएसएससी द्वारा प्रार्थियों का चयन यह कहते हुए नहीं किया कि इनकी शैक्षणिक योग्यता विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप नहीं है. प्रार्थियों के पास विज्ञापन में निर्धारित मुख्य बिषय के बजाय सहायक बिषयों की डिग्री है. जबकि नियुक्ति नियमावली में ऐसा नहीं है.

