
उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की पीठ ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा नियुक्ति परीक्षा परिमाण को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरूवार को सुनवाई के बाद खारिज कर दी. अदालत ने देरी से याचिका दाखिल करने पर प्रार्थियों की याचिका खारिज की. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जब पूरे मामले की जानकारी याचिकाकर्ता को पहले से ही थी, तो इतनी देर से कोर्ट क्यों आए. अदालत ने कहा कि जेपीएससी ने जब अखबारों के जरिए भी डिजिटली कॉपियों का मूल्यांकन किये जाने की जानकारी साझा की गई थी. इसकी शिकायत उसी समय की जा सकती थी. जबकि प्रार्थी आयुब तिर्की और राजेश प्रसाद की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अदालत को बताया गया था कि जेपीएससी की ओर से अभ्यर्थियों के कापियों का मूल्यांकन नियमानुसार नहीं किया गया है.
मूल्यांकन कार्य डिजिटली किया गया और मूल्यांकन करने वालों की शैक्षणिक योग्यता भी नियमानुसार नहीं है. ऐसे में जेपीएससी की ओर से जारी परिणाम को निरस्त कर देना चाहिए. वहीं जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल व प्रिंस कुमार सिंह ने अदालत को बताया कि डिजिटल रूप में मूल्यांकन करने की जानकारी सभी अखबारों में प्रकाशित की गई थी. ऐसे में प्रार्थी का यह कहना कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. यह पूरी तरह से गलत है. परिणाम जारी करने के काफी दिनों बाद याचिका दाखिल की गई है. जबकि आयोग की ओर से चयनित अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जा रहा है. इस पर अदालत ने कहा कि देरी से याचिका दाखिल करना सही नहीं है. आपको पता था कि जेपीएससी की ओर से डिजिटल रूप में मूल्यांकन किया जा रहा है तो उसी समय चुनौती दी जानी चाहिए थी. इसके साथ ही अदालत ने मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी. वहीं याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि एकल बेंच के आदेश को डबल बेंच में चुनौती दी जायेगी.

