
उदित वाणी, देवघर : झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मंगलवार को देवघर स्थित एम्स के छठे वार्षिकोत्सव को संबोधित करते हुए डॉक्टरों का आह्वान किया कि वे अपने पेशे में मानवता को सर्वोपरि रखें.
उन्होंने कहा कि चिकित्सक का दायित्व केवल रोग का उपचार करना ही नहीं है, बल्कि रोगी के मन में स्वस्थ होने की आशा और विश्वास जगाना भी है. राज्यपाल ने कहा कि डॉक्टर की अच्छी वाणी, धैर्य और स्नेह कई बार मरीजों के लिए सबसे बड़ी औषधि साबित होती है. यही कारण है कि अस्पताल केवल इलाज का स्थान नहीं, बल्कि मानवता और करुणा का मंदिर भी होता है.
एम्स के विद्यार्थियों से राज्यपाल ने कहा कि उनका सफेद कोट केवल परिधान नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और कर्तव्यनिष्ठा की शपथ है. संवेदनशीलता और निष्ठा ही देवघर एम्स की वास्तविक पहचान बने, इसमें मेडिकल के छात्रों की बड़ी भूमिका होगी. उन्होंने 31 जुलाई को राष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न एम्स के प्रथम दीक्षांत समारोह को ऐतिहासिक बताया और कहा कि वह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं था, बल्कि सेवा का संकल्प लेने का क्षण था.
गंगवार ने कहा कि 270 एकड़ में फैला एम्स देवघर 750 बेड वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल है, जहां अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं, डायग्नोस्टिक सेवाएं और शोध केंद्र उपलब्ध हैं. यहां झारखंड के अलावा बिहार और बंगाल से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं.
राज्यपाल ने इस बात पर खुशी जताई कि अब तक सात लाख से अधिक मरीजों को ओपीडी सेवाओं से लाभ मिल चुका है. स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, उन्नत भारत अभियान के अंतर्गत गांव गोद लेना और जन औषधि केंद्र जैसी पहलें संस्थान के सामाजिक दायित्व को दर्शाती हैं. राज्यपाल ने कहा कि एम्स देवघर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र को साकार कर रहा है और ‘विकसित भारत’ के निर्माण में इसकी भूमिका महत्त्वपूर्ण होगी.
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने एम्स में एक्स-रे 1000 एमए, 128-स्लाइस सीटी स्कैन और कार्डियक कैथेटराइजेशन लैब का भी उद्घाटन किया. इस मौके पर गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे.
(आईएएनएस)

