
उदित वाणी, रांची : वित्तमंत्री राधा कृष्ण किशोर ने हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर सीएसआर फंड के खर्च करने के मामले में झारखंड सरकार का नियंत्रण होने का सुझाव दिया है. वित्तमंत्री ने इस संबंध में झारखंड सरकार के मुख्यसचिव अलका तिवारी को पत्र लिखकर कहा है कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व सीएसआर के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण की रक्षा, वृक्षारोपण, ग्रामीण विकास, जल संरक्षण, आपदा राहत, पुनर्वास तथा कला संस्कृति के संरक्षण के माध्यम से सामाजिक आर्थिक ढांचे का विकास करना होता है.
झारखंड के कई बैंकों ने केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए गए उक्त क्षेत्रों में सीएसआर की राशि का व्यय नहीं किया जा रहा है. उन्होंने उदाहरण स्वरूप कहा कि कुछ बैंकों द्वारा झारखंड के दो-चार पाठशालाओं में छात्र-छात्राओं के बीच डेढ़-दो लाख रुपये का स्कूल बैग वितरित किया गया है. वहीं कुछ बैंकों के द्वारा बर्ष 2022-23 में एक सरकारी विभाग के कर्मचारियों के बीच मात्र दो हजार रुपये का फूड पैकेट एवं 22 हजार रुपये की राशि की शॉल का वितरण किया गया. उन्होंने कहा कि सीएसआर फंड की राशि का इस तरह के उपयोग किये जाने से झारखंड राज्य में व्याप्त गरीबी का उन्मूलन नहीं किया जा सकता है.
सीएसआर फंड का उपयोग केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित बिषयों पर किया जाना चाहिए. इसके लिए एक पारदर्शी प्रणाली स्थापित किये जाने की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में सीएसआर फंड का अनावश्यक मदों पर खर्च तथा फिजूल खर्च को रोकने के लिए एक प्रभावशाली व्यवस्था की गई है. इसके अंतर्गत सभी व्यय प्रस्तावों को सम्पूर्ण तथ्य के साथ हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के समक्ष निर्णय के लिए प्रस्तुत किया जाता है और उनके अनुमोदन के उपरांत ही सीएसआर की राशि खर्च की जा सकती है. इसी प्रकार की व्यवस्था झारखंड में भी किया जाना चाहिए.
