
उदित वाणी, रांची : जनगणना में सरना धर्म कोड का कॉलम नहीं होगा. जनगणना को लेकर राजस्व एवं भूमि सुधार व निबंधन विभाग द्वारा राज्य में जनगणना कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और उक्त राजस्व व भूमि सुधार मंत्री दीपक बिरूवा ने अपनी स्वीकृति दे दी है. इस प्रस्ताव में जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड का कॉलम जोड़ने का कोई उल्लेख नहीं है. ज्ञात हो कि राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी झामुमो, कांग्रेस समेत कई अन्य पार्टियां जनगणना धर्म कॉलम में सरना धर्म कोड का जोड़ने की मांग करती रही है.
विधानसभा से भी इस संबंध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भी भेजा गया था. लेकिन इस बार की जनगणना में कई चौंका देनेवाली आंकड़े आयेंगे. इस बार की जनगणना में इस संबंध में पता चलेगा कि राज्य में कितने सरना धर्मावलंबी मुसलमान या ईसाई धर्म में कनवर्ट हुए है. और राज्य में कितने सरना आदिवासी बचे हैं. उनमें से कितने उरांव, कितने मुंडा, कितने हो, कितने संथाल और कितने अन्य जनजाति समुदाय से आते हैं.
हर जाति और उसकी उप जातियों के आंकड़े जनसंख्या रिपोर्ट में पेश की जायेगी. हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक जातीय जनगणना के फॉरमेट को अंतिम रूप नहीं दिया है. परंतु बर्ष 1931 के बाद पहली बार राज्य की जनगणना में सभी समुदायों की जातियों की व्यापक गणना होगी. जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी. वहीं यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी. जिसमें डेटा संग्रह के लिए मोबाइल एप्लिकेशन, नागरिकों के लिए ऑनलाइन स्वगणना विकल्प और रीयल टाइम निगरानी उपकरण का उपयोग किया जाएगा.
अप्रैल से सितंबर 2026 को राज्य सरकार द्वारा चुनी गई 30 दिनों की अवधि के दौरान राज्य में लोगों के आवास की स्थिति, संपत्ति और घरेलू सुविधाओं पर डेटा एकत्र किया जायेगा. जबकि मुख्य जनसंख्या गणना 9 फरवरी 2027 से 1 मार्च 2027 तक के चरण में लोगों के आयु, वैवाहिक स्थिति, धर्म, जाति, जनजाति, मातृभाषा, शिक्षा, विकलांगता, आर्थिक गतिविधि, प्रवासन और प्रजनन क्षमता जैसे व्यक्तिगत विवरण एकत्र किए जायेंगे.
