
गुणवत्ता के बारे में जागरूक करने के लिए स्कूलों में खोले जा रहे स्टैंडर्ड क्लब
उदित वाणी, जमशेदपुरः ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) ने उपभोक्ताओं के लिए बीआईएस केअर एप लांच किया है, जिसके जरिए वे जान सकते हैं कि बाजार से जो उत्पाद या सामान खरीद रहे हैं, वह असली है या नकली. बीआईएस जमशेदपुर के निदेशक एसके वर्मा ने बताया कि सबसे पहले इस एप को गूगल प्लेस्टोर से डाउनलोड करना होगा.
उपभोक्ताओं को किसी भी वस्तु या उत्पाद पर आईएसआई चिह्न, हॉलमार्क और सीआरएस पंजीकरण चिह्नों की प्रामाणिकता को सत्यापित करने के लिए सशक्त बनाने वाला यह आसान एप है. उत्पाद या वस्तु पर दिखाई देने वाली लाइसेंस संख्या/एचयूआईडी संख्या/पंजीकरण संख्या दर्ज करने के बाद उस उत्पाद या सामान के बारे में सारे प्रासंगिक विवरण प्राप्त किया जा सकता है.
आप यह भी पता कर सकते हैं कि जो उत्पाद आप ले रहे हैं वह कहां बना हैं, उसका कम्पोजिशन क्या है और उसकी शुद्धता क्या है.इसमें निर्माता का नाम और पता, लाइसेंस या पंजीकरण की वैधता, लाइसेंस या पंजीकरण के दायरे में आने वाली किस्में, ब्रांड शामिल होता है. अगर उत्पाद की गुणवत्ता में किसी तरह की शिकायत हो तो आप एप के जरिए अपनी शिकायत रजिस्टर कर सकते हैं. यही नहीं आपके उत्पाद के निर्माता का वर्तमान लाइसेंस या पंजीकरण की स्थिति, आभूषण या वस्तु की शुद्धता को भी यह बताता है.
गुणवत्ता की जागरूकता को लेकर स्कूलों में स्टैंडर्ड क्लब
वर्मा ने बताया कि स्कूली विद्यार्थियों को गुणवत्ता के बारे में जागरूक करने के लिए स्कूलों में स्टैंडर्ड क्लब बनाए जा रहे हैं. जमशेदपुर समेत रांची, बोकारो और धनबाद के स्कूलों में अभी तक 32 स्टैंडर्ड क्लब बनाए गए हैं.
बिना हॉलमार्क के आभूषण नहीं खरीदें
वर्मा ने बताया कि आभूषणों की खरीदारी में सबसे ज्यादा ठगी होती है. एक आम ग्राहक गहनों की शुद्धता के बारे में नहीं जान पाता. दुकानदार जो कहता है, उस पर विश्वास कर लेता है. ऐसे में हॉलमार्किंग होने से गहनों का एक मानकीकरण हो जाता है और उसमें ठगाने की संभावनाएं कम हो जाती है.
बकौल वर्मा, हम हर रोज आभूषणों की दुकानों से सैंपल लेकर उसका परीक्षण करते हैं और अगर किसी दुकानदार के सैंपल में गड़बड़ी पाई जाती है तो उस पर उचित कानून कार्रवाई होती है. झारखंड में कोई टेस्टिंग सेंटर नहीं है. हमने जमशेदपुर में विभिन्न एसेसिंग सेंटर को अधिकृत कर रखा है, जो गहनों को एसेस कर उसकी शुद्धता बताते हैं.
इन सेंटरों द्वारा शुद्धता को लेकर की जाने वाली हेराफेरी के बारे में कहा कि हम उन पर नियंत्रण रखते हैं. बावजूद गड़बड़ियां तो होती ही हैं. अगर कोई शिकायत आती है तो उस पर हम कारर्वाई करते हैं. यही नहीं हम समय-समय पर ज्वेलरी दुकानों को ऑडिट करते हैं.
516 फैक्ट्री को लाइसेंस दिया है
एसके वर्मा ने बताया कि बीआईएस ने झारखंड में अभी तक 516 फैक्ट्री को लाइसेंस प्रदान किया है. बिना लाइसेंस के कोई कंपनी अपने उत्पाद पर आईएसआई का लोगो नहीं लगा सकती है. इसमें टाटा समूह की कंपनियों के साथ कई दूसरी कंपनियां भी शामिल हैं.
देश भर में बीआईएस के 41 ब्रांच ऑफिस
वर्मा ने बताया कि देश भर में बीआईएस के 41 ब्रांच ऑफिस हैं. सबसे ज्यादा गुजरात में इसके ऑफिस हैं, क्योंकि वहां पर उद्योग ज्यादा हैं. उल्लेखनीय है कि
बीआईएस, बीआईएस अधिनियम 2016 के अंतर्गत स्थापित भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है जो मानकीकरण और सामान के गुणवत्ता प्रमाणन की गतिविधियों में शामिल हैं.
बीआईएस सुरक्षित विश्वसनीय गुणवत्ता वस्तु प्रदान करके उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य जोखिम कम करता है और निर्यात और आयात विकल्पों को प्रोत्साहित करता है.

