
टाटा स्टील के मेडिकल सर्विसेस के प्रमुख डॉ.राजन चौधरी हुए रिटायर
उदित वाणी, जमशेदपुर: डॉ.राजन चौधरी कहते हैं, जब जंग का मैदान सामने हो तो फिर अपनी मुश्किलों और परेशानियों को नहीं देखा जाता. अपना फर्ज निभाना ही असल मकसद हो जाता है.
एयर फोर्स के डायरेक्टर जेनरल रहे एयर मार्शल डॉ.चौधरी ने कहा कि कोविड महामारी के खिलाफ लड़ना हमारा फर्ज था. 31 अगस्त को टाटा स्टील के मेडिकल सर्विसेस के प्रमुख पद से सेवानिवृत हुए डॉ.राजन चौधरी ने टाटा स्टील के सीनियर मैनेजमेंट को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उन पर भरोसा जताया और इस महामारी के दौरान काम करने का मौका दिया.
उन्होंने टाटा स्टील के शीर्ष प्रबंधन के साथ ही टीएमएच के डॉक्टरों, नर्स और पारामेडिकल स्टॉफ को धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस जंग में उनका साथ दिया. जब सारे लोग घरों में बैठे थे, काम करने वाले वर्क फ्रोम होम कर रहे थे, हमारे डॉक्टरों ने कोविड वार्ड और कोविड नन वार्ड में काम किया.
उन्होंने कहा कि यह टाइम बेहद चैलेजिंग रहा. कई बार देर रात फोन आते थे. 12 से लेकर 16 घंटे हम काम पर होते, लेकिन इसका कभी रिग्रेट नहीं रहेगा.
1200 बेड बनाए
डॉ.चौधरी ने बताया कि कोरोना के ढ़ाई साल में हमने टीएमएच की ढ़ाचागत संरचना को भी बेहतर किया. दिसंबर 2019 और जनवरी 2020 में जब कोरोना का संक्रमण चीन की सीमा को पार करने लगा तो हमारे लिए यह बीमारी बिल्कुल नई थी.
भारत में फरवरी और मार्च तक यह वायरस दाखिल हो गया, जबकि जमशेदपुर में पहला संक्रमण का मामला अप्रैल माह में सामने आया. बकौल डॉ.चौधरी, इस बिमारी को लेकर हमें अपनी तैयारियां करनी थी. टाटा के कर्मचारियों के साथ ही आसपास के लोगों का इलाज भी करना था. हमारे पास टाइम बेहद कम था. इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं था.
लेकिन हमने एक चीज सुनिश्चित किया कि राज्य सरकार के साथ ही केन्द्र सरकार के जो समय-समय पर दिशा निर्देश आ रहे थे, उसे कड़ाई से पालन करते हुए लोगों को भी बताया जाय. इसमें मीडिया का काफी योगदान रहा. हमने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सप्ताह में दो-दो दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस किए, ताकि लोगों को टीएमएच के साथ ही इस बीमारी की ताजा स्थिति की जानकारी मिलती रही.
जो हमारे पास सूचना थी, उसी के तहत हम आगे बढ़े. जिला प्रशासन का भी काफी योगदान रहा. हमने मेडिकल स्टॉफ की सारी छुटि्टयां कैंसल कर दी. कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही हमें बेड की कमी की समस्या से जुझना पड़ा. हम तुरंत डॉक्टर तो अप्वाइंट नहीं कर सकते थे, लेकिन हमने कोशिश की कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों की देखभाल की जा सके.
इसके लिए टीएमएच के अलावा कई होटल, गेस्ट हाउस को भी हमने कोविड सेंटर बनाया और जो गंभीर मरीज नहीं थे, उनका इलाज यहां पर किया. दूसरी लहर तक हम 1200 बेड बना चुके थे. दवाईयों को हमने दूसरे राज्यों से मंगाया. जिले के तत्कालीन डीसी की पहल पर टीएमएच में हमने आरटीपीसीआर टेस्टिंग लैब को इन्स्टॉल किया और इसे शुरू किया. इसके अलावा दो लैब ओडिशा में भी लगाए.
मरीजों के साथ कम्युनिकेशन ती रही चुनौती
दूसरी लहर में सबसे बड़ी चुनौती मरीजों के साथ उनके परिजनों के कम्युनिकेशन का था. कोविड के मरीज होने के चलते परिजनों को भी उनसे मिलने की इजाजत नहीं थी. बुजुर्ग माता-पिता में काफी दहशत थी. इस चुनौती को देखते हुए हमने फोन कॉल्स के साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया, ताकि परिजनों को स्थिति के बारे में जानकारी मिलती रहे.
वैक्सीनेशन पर रहा जोर
वैक्सीन भी एक बड़ी चुनौती थी. हम समझ गये थे कि इस वायरस को रोकना है तो वैक्सीनेशन ही एकमात्र उपाय है. हम सीधे सीरम इन्स्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संपर्क में थे. शुरू में टाटा स्टील के एयरक्रॉफ्ट के जरिए पुणे से वैक्सीन मंगाए गये.
वैक्सीनेशन को तेज करने के लिए हमने सरकार के साथ मिलकर पहल की. शहर में कई ऐसे कोविड वैक्सीनेशन सेंटर बनाए गए, जिसमें मैनपावर हमारा और सरकार की ओर से वैक्सीन की सप्लाई की जाती थी.
केवल टीएमएच ने साढ़े तीन लाख लोगों को कोरोना की वैक्सीन दी है. हमारे वैक्सीनेशन का जो प्रिंटआउट था, वह नेशनल और इंटरनेशनल ट्रेवल में भी मान्य थे.
आगे क्या
डॉ.राजन चौधरी ने बताया कि वैक्सीनेशन के साथ ही कोरोना का संक्रमण कम होते गया है. अब जो वायरस है, उसमें किलिंग पावर नहीं रह गया है, क्योंकि वैक्सीनेशन के बाद लोगों की इम्युनिटी बढ़ गई है. अब ज्यादा से ज्यादा यही होगा कि दो तीन दिन बुखार रहेगा, देह में दर्द होगा और गले में खरास रहेगा. कुछ दिन कमजोरी भी रह सकती है लेकिन मरने की संभावना बेहद कम हो गई है. मौत कोमोरबिटीज के चलते हो सकती है.
लोगों की बात पर रिस्पांस नहीं करते
डॉ. राजन चौधरी ने कहा कि जब महामारी अपने उफान पर थी तो मरीजों का परेशान और गुस्सा होना लाजिमी है. लेकिन मेडिकल के प्रोफेशन में लोगों के रिस्पांस पर हम रिस्पांस नहीं करते. हमारा काम मरीजों की सेवा करना है.
लोग क्या कह रहे हैं, उसके बारे में हमें नहीं सोचना चाहिए और न ही रिएक्शन देना चाहिए. टीएमएच में हम जितने कोविड मरीज का इलाज कर रहे थे, वह दिल्ली के कई अस्पतालों से ज्यादा है.
2016 में ज्वाइन किया
डॉ.राजन चौधरी ने 7 जुलाई 2016 को टीएमएच ज्वाइन किया. 6 साल रहे, कोविड महामारी में काम करने का मौका मिला. कहते हैं-महामारी के दौरान कम कभी रिलैक्स नहीं रहे, क्योंकि यह हमारा काम है.
बावजूद हर दिन सुबह एक घंटे मॉर्निंग वॉक जरूर करता. कोविड के दौरान बाहर नहीं, अपने क्वार्टर में भी एक घंटा वॉक जरूर करता था. और जब हम काम करते हैं तो फिर कभी स्ट्रेस फील नहीं करते.
कहा-67 साल के हो गये हैं. कल दिल्ली घर जा रहा हूं. आगे कोशिश होगी कि कम्युनिटी की सेवा कर सकूं.

