
उदित वाणी, जमशेदपुर: एनआईटी जमशेदपुर में शनिवार को 12 वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया. इसमें कुल 1037 छात्र-छात्राओं के बीच डिग्री और उपाधि बांटे गए.
समारोह में अंडर ग्रेजुएट कोटि से सिविल ब्रांच की टॉपर छात्रा हंसा कुमारी और एमसीए की छात्रा दिव्यांशी अग्रवाल को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया. समारोह में बतौर मुख्य अतिथि टाटा स्टील के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन शामिल हुए. वही विशिष्ट अतिथि के रूप में आरएसबी ग्रुप के चेयरमैन आरके बेहरा भी मौजूद रहे.
इसमें कुल 1037 छात्रों के बीच डिग्रियां बांटी गई. जिनमें अंडर ग्रेजुएट के 643, पोस्ट ग्रेजुएट के 366 और पीएचडी के कुल 28 छात्र शामिल रहे. दीक्षांत समारोह में कुल 671 छात्रों के शामिल हुए.
समारोह में स्वागत भाषण संस्थान के निदेशक प्रो. केके शुक्ला ने दिया. कहा कि छात्रों का असली सफर अब शुरू होगा. उन्होंने कहा कि संस्थान के छात्रों का प्लेसमेंट उत्साहजनक है. नए सत्र में नई शिक्षा नीति को लागू किया का रहा है. मंच पर उपस्थित नरेंद्रन ने विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र दिए. समारोह में बीटेक के 643, पीजी के 366 और एमसीए के 28 छात्रों यानि कुल 1037 छात्रों को प्रमाण पत्र दिया गया.
इनमें दो छात्राओं को गोल्ड व 23 छात्रों को सिल्वर मेडल दिया गया. समारोह को संबोधित करते हुए टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने कहा कि उन्होंने 1986 में एनआईटी त्रिचीरा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और इसके बाद जैसा रास्ता बनता गया करियर में वैसे आगे बढ़ते गए.
उन्होंने छात्रों से अपील की कि आप जॉब देने वाला बनिए, जॉब सीकर नहीं. सोसायटी के लिए प्रेरणास्रोत बनिए, आप चाहे तो देश की तस्वीर और तकदीर बदल सकते हैं.
ग्लोबल लेवल पर बदलाव लाकर भारत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की जिम्मेदारी आप लोगों पर है. आज विश्व की इकोनॉमी रसिया-यूक्रेन वार की वजह से डगमगा गई है. ऐसे में आपको खुद को खड़ा करना है.
तकनीक के साथ कदमताल करना जरूरी
आने वाले 30 वर्ष विश्व के लिए महत्वपूर्ण है, इसमें हमारी टेक्नोलॉजी ही हमें आगे रख सकती है. नरेंद्रन ने कहा कि भारत अब भी स्टील उत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर हैं.
यूएस और चीन हम से काफी आगे हैं, लेकिन आने वाले 30 वर्षों में जो बदलाव होना है उसमें उम्मीद की जानी चाहिए कि हम भी नंबर एक के पायदान पर पहुंच जाएंगे. नरेंद्रन ने कहा कि तकनीक के कारण आज वैश्विक इकोनॉमी में तेजी से बदलाव आ रहा है. इसलिए जरूरी नहीं कि आज जो नौकरियां हम कर रहे हैं वह 20 साल बाद भी रहे.
20 साल बाद नौकरियों की प्रवृत्ति बदल जाएगी और बाजार की जरूरत भी. नरेंद्र ने कहा कि हमें सफलता के लिए पांच मूल मंत्र को ध्यान रखना चाहिए. इसमें ग्लोबल कनेक्टिविटी, यानी पूरे विश्व में क्या घटित हो रहा है इसकी जानकारी होनी चाहिए.
इसके साथ ही वैश्विक जियो पॉलीटिकल घटनाक्रम की भी जानकारी होनी चाहिए. तभी हम अपने स्तर पर रणनीति बना सकते हैं. वैश्विक महामारी कोरोना इसका उदाहरण है पहले हम सोच रहे थे कि यह सिर्फ चाइना में हैं लेकिन बाद में यह पूरे विश्व में फैला. इसलिए बाजार को भी ऐसी अनुरूप तैयार रहना होगा.
इसके अलावा हमें तकनीक के बदलते दौर में उसके साथ ढलना होगा और तकनीक के क्षेत्र में आगे रहना होगा. यह सब कुछ ऐसी मूलभूत बातें हैं जिससे हम सफलता कि और बढ़ सकते हैं और अगले 30 साल के लिए तैयार रह सकते हैं.
उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि आज जो बाजार को चाहिए 30 साल बाद भी चाहिए होगा. इसमें बदलाव बहुत तेजी से हो रहा है और विकल्प भी तुरंत उपलब्ध हो रहे हैं. जरूरी नहीं कि आज स्टील की जरूरत है तो कल को इसका कोई विकल्प भी सामने आ जाएगा.
आरएसबी के डायरेक्टर ने इनोवेशन सेंटर का 50 फीसदी खर्च उठाने की घोषणा की
विशिष्ट अतिथि आरएसबी के डायरेक्टर आरके बेहरा ने पास आउट छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना की. साथ ही कहा कि आप जॉब देने वाला बनिए तभी आपकी डिग्री सही मायने में सफल मानी जायेगी.
आज भारत इनोवेटिव कंट्री के रूप में जाना जा रहा है. यहां से डिग्री हासिल कर आज मैं एक सफल उद्यमी बन गया हूं. देश व विदेश में 11 जगहों पर हमारा प्लांट है, जिनमें 7 हजार स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं. मैं अपनी सफलता से संतुष्ट हूं. इस दौरान उन्होंने घोषणा किया कि प्रफुल्ल पाणिग्रही द्वारा स्थापित की जा रही इनोवेशन सेंटर का 50 फीसदी खर्च आरएसबी ट्रांसमिशन उठाएगा.



