
उदित वाणी, जमशेदपुर: गांधी पीस फाउंडेशन जमशेदपुर द्वारा “सार्वभौमिक मानव और संवैधानिक मूल्य” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशा की शुरुआत शुक्रवार को ट्राइबल कल्चरल सेंटर सोनारी में हुई.
जमशेदपुर के विभिन्न कॉलेज के करीब 50 छात्रों ने इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई. इसमें अन्य राज्यों से आए सीनियर रिसोर्स पर्सन के अलावा शहर के समाजसेवी भी उपस्थित थे. कार्यक्रम की शुरुआत में सामाजिक कार्यकर्त्ता अरविंद अंजुम ने कहा कि इस शिविर का उद्देश्य है छात्रों के बीच नई सोच पैदा करना है.
शिविर के माध्यम से उन्हे संविधान और संविधौनिक एवं अन्य मानवीय मूल्यों की नई जानकारी मिलेगी. कार्यशाला के शुरुआती सत्र में स्वतंत्र पत्रकार और समाजसेवी विकास कुमार ने बताया की अकसर इंसानों पर आरोप लगता हैं उसका प्राकृतिक स्वभाव लोकतांत्रिक नही है और लोकतंत्र इंसान पर जबरन थोपा जा रहा.
लेकिन मनुष्य के करीबी वानर और रिश्तेदार चिम्पांजी और बोनोबो में भी राजनीतिक व्यवहार देखा गया है और वहां भी चुनाव होता हैं और नेता चुना जाता है. समर्थकों को जुटाने के लिए इंसानों की तरह कूटनीति का इस्तेमाल करते हैं. लड़ाई के बाद सुलह भी किया जाता.
भारत के लोकतंत्र बनने की विकास यात्रा
अरविंद अंजुम ने भारत के लोकतांत्रिक गणराज्य बनने के विकास क्रम पर अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि उपनिवेशी काल में दर्जनों रेगुलेशन और अधिनियमों ने ना केवल लोकतांत्रिक गणराज्य बल्कि संविधान की बुनियाद रची.
उन्होंने कहा कि संविधान बनना एक जटिल प्रक्रिया रहा हैं. कई देशों के संविधान की अच्छी बातों को इसमें समाहित किया गया. भारतीय समाज में कई तरह की विषमताएं रही हैं. हर तरह से इसमें न्याय देने काप्रयास किया गया हैं.
संविधान के विभिन्न अनुच्छेद पर चर्चा
आखरी सत्र में कंपनी सेक्रेटरी और वकील मंजरी सिन्हा ने भारतीय संविधान में विभिन्न अनुच्छेद की चर्चा की जो समता का अधिकार देता है. इसमें उन्होंने मुख्य रूप से आर्टिकल 12 , 13, 14, 15, 16, 17 के बारे बताया.
संविधान द्वारा हजारों सालों से सामाजिक विषमता के शिकार वंचित समुदाय जैसे दलित, आदिवासी,महिला के लिए बनाए विशेष प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा हुई .वर्कशोप में छात्रों के अलावा अरविंद अंजुम, विकास, मंजरी सिन्हा, डीएनएस आनंद, विक्रम झा, अमर सेंगर, अंकुर, अनमोल, अंकित, रमन ने भी उपस्थिति दर्ज कराई.

