
उदित वाणी, जमशेदपुर: जमशेदपुर व इसके आसपास के आदिवासी-मूलवासी बहुल इलाकों में टुसू पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में है. ग्रामीण इलाकों के घर-द्वार चमका दिए गए हैं. दीवारें खुद झारखंड के इस सबसे बड़े पर्व को लेकर बोलने लगी है.
जी हां, टुसू पर्व झारखंड के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एकहै। टूसू का शाब्दिक अर्थ होता है कुंवारी कन्या की मूर्ति. चूंकि यह पर्व झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, मिदनापुर व बांकुड़ा समेत ओडिशा के क्योंझर, मयूरभंज, बारीपदा जिलों में मनाया जाता है, इसलिए जिले में इस पर्व का अलग ही असर दिखता है.
यह एकमात्र ऐसा पर्व है, जिसमें शहर के अधिकतर होटलों तक को बंद करना पड़ जाता है, क्योंकि इस पर्व के कारण पुरुलिया जैसी जगहों के मिठाई कारीगर छुट्टी पर चले जाते हैं.
इस उत्सव को अगहन संक्रांति (15 दिसंबर) से लेकर मकर संक्रांति (14 जनवरी) तक इसे कुंवारी कन्याओं द्वारा टुसू पूजन के रूप में मनाया जाता है. घर की कुंवारी कन्याएं प्रतिदिन संध्या समय में टुसू की पूजा करती हैं. कुड़मी समाज के हरमोहन महतो बताते हैं कि अगहन संक्रांति के दिन गांव की कुंवारी कन्याएं टुसू की मूर्ति बनाती हैं.
इसी मूर्ति के चारों ओर सजावट करती हैं और फिर धूप, दीप के साथ टुसू की पूजा करती हैं. मकर संक्रांति के दिन टुसू पर्व मनाया जाता है और फिर उसके अगले दिन इसे नदी में प्रवाहित किया जाता है.
मकर संक्रांति के एक दिन पहले पुरुषों द्वारा बिना बाजी का मुर्गोत्सव मनाया जाता है, जिसे बाउड़ी कहा जाता है. इस उत्सव से लौटने के उपरांत सारी रात लोग गाते-बजाते हैं. सुबह सभी ग्रामीण मकर स्नान के लिए नदी पहुंचते हैं. स्नान के दौरान गंगा माई का नाम लेकर मिठाई भी बहाते हैं. उत्सव और मेले का आनंद लेने के बाद टुसू का विसर्जन गाजे-बाजे के साथ कर दिया जाता है.
टुसू पर्व मनाने के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं. शहर में दोमुहानी व भुइयांडीह में बड़े पैमाने पर टुसू पर्व पर मेले का आयोजन किया जाता है. इस बार भी यहां व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं.
बहरहाल, ग्रामीण इलाकों में मकर पर्व को लेकर में रौनक बढ़ गई है. पर्व को लेकर नए कपड़ों एवं पकवानों के लिए सामग्रियों की खरीददारी में लोग अभी से जुट गए हैं. दुकानों में भीड़ उमड़ रही है. दूसरी ओर बिक्री के लिए तैयार टुसू मूर्ती को खरीदने के लिए शहर से लेकर गांव तक के मूर्तीकारों के पास खास तौर पर महिलाओं व युवतियों की भीड़ उमड़ है.

