
फरियादी अस्पताल बना कोल्हान का सबसे बड़ा सरकारी हास्पीटल
उदित वाणी, जमशेदपुर: कोल्हान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम पूरी तरह से फरियादी अस्पताल बन चुका है. कहने का तात्पर्य है कि मरीज के इलाज के लिए चिकित्सकों के पास फरियाद करनी होगी तभी जा कर आपका इलाज हो पाएगा. खास कर ऑर्थोपेडिक डिपार्टमेंट में. टूटी हड्डी के ऑपरेशन के लिए 10 से 15 दिनों का इंतजार करना होगा. एमजीएम अस्पताल में हड्डी रोग के तीन विशेषज्ञ हैं.
फिर भी 24 मई से आधा दर्जन मरीज ऑपरेशन के इंतजार में है. इससे हाथ-पांव टूटने पर अस्पताल पहुंचे लोग न चाहकर भी ऑपरेशन के लिए एमजीएम की ऑर्थो वार्ड में पड़े रहते हैं. स्थिति यह है कि 54 बेड के ऑर्थो वार्ड में अभी 49 मरीज हाथ-पांव में प्लास्टर कराने के बाद से भर्ती हैं.
मरीज ज्यादा, चिकित्सक व पारा मेडिकल स्टॉफ की कमी
एमजीएम अस्पताल में आवश्यकता के अनुसार ना तो चिकित्सक हंै और ना ही पारा मेडिकल स्टॉफ. यही कारण है कि प्रत्येक दिन औसत 3 ऑपरेशन होने के बाद भी लोगों को 15-15 दिन अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है. ऑर्थोपेडिक वार्ड में एडमिट नीमडीह के आदेश महतो का 16 दिन बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया. वहीं सीतरामडेरा के अजय भुइयां के पांव का ऑपरेशन 10 दिन बाद हो पाया.
सफाई पर लाखों खर्च करने पर भी नहीं जा रही बदबू
एमजीएम अस्पताल की सफाई के लिए हर माह लगभग 33 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं यानि प्रत्येक दिन औसत 1 लाख 10 हजार. बावजूद इसके अस्पताल के हर विभाग में लोग बदबू से परेशान हैं. गंदगी के कारण लोगों का वार्ड में रहना मुश्किल हो रहा है. बताया जाता है कि सफाई के मद के पैसे का आधा हिस्सा ही वास्तव में सफाई कर्मियों व सफाई सामग्री में खर्च होता है

