
उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर में तेज आवाज करने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ ट्रैफिक पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए विशेष अभियान शुरू किया है. इस अभियान के तहत शहर के विभिन्न इलाकों में चलाए गए जांच अभियान के दौरान करीब 42 बुलेट मोटरसाइकिलों को पकड़ा गया. जांच में पाया गया कि इन सभी बाइकों में नियमों के विरुद्ध तेज आवाज करने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर लगाए गए थे, जिससे ध्वनि प्रदूषण फैल रहा था.
ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मौके पर ही सभी बाइकों से मॉडिफाइड साइलेंसर को निकालकर जब्त कर लिया. इसके साथ ही वाहन चालकों पर जुर्माना लगाया गया और सख्त चेतावनी देकर छोड़ दिया गया. पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा कि शहर में नियमों के खिलाफ चलने वाले वाहनों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी.
शहर के अलग-अलग इलाकों में चला अभियान
ट्रैफिक पुलिस द्वारा यह अभियान शहर के कई व्यस्त और संवेदनशील इलाकों में चलाया गया. पुलिस की टीमों ने सड़क पर चेकिंग अभियान चलाकर विशेष रूप से उन बाइकों को रोका जिनसे अत्यधिक तेज आवाज आ रही थी.
जांच के दौरान यह सामने आया कि अधिकांश बाइक चालकों ने अपनी रॉयल एनफील्ड बुलेट में कंपनी द्वारा लगाए गए ओरिजिनल साइलेंसर को हटाकर उसकी जगह मॉडिफाइड साइलेंसर लगवा रखा था. इन साइलेंसर से तेज धमाके जैसी आवाज निकलती है, जिसे आम बोलचाल में “पटाखा फोड़ना” भी कहा जाता है.
ट्रैफिक पुलिस ने मौके पर ही मैकेनिक की मदद से इन साइलेंसर को बाइक से निकलवाकर जब्त कर लिया और संबंधित चालकों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान किया गया.
“पटियाला साइलेंसर” युवाओं में सबसे ज्यादा लोकप्रिय
शहर के कई बाइक दुकानदारों का कहना है कि आजकल युवाओं में तेज आवाज करने वाले साइलेंसर का चलन तेजी से बढ़ा है. खासकर 18 से 25 साल के युवा बाइक में मॉडिफाइड साइलेंसर लगवाकर सड़क पर तेज आवाज करके शो ऑफ करना पसंद करते हैं.
दुकानदारों के अनुसार सबसे ज्यादा मांग “पटियाला साइलेंसर” की रहती है. यह साइलेंसर काफी तेज आवाज करता है और इसकी कीमत लगभग 1500 से 1600 रुपये तक होती है. इसी वजह से यह युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है.
हालांकि बाजार में 10 से 12 हजार रुपये तक के ऐसे साइलेंसर भी उपलब्ध हैं जिनकी आवाज अपेक्षाकृत कम होती है और वे ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन अधिकांश लोग उन्हें खरीदना पसंद नहीं करते. ज्यादातर युवक कम कीमत वाले तेज आवाज करने वाले साइलेंसर को ही प्राथमिकता देते हैं.
बाइक के इंजन और माइलेज पर भी पड़ता है असर
मैकेनिक और दुकानदारों का कहना है कि मॉडिफाइड साइलेंसर का इस्तेमाल सिर्फ नियमों का उल्लंघन ही नहीं है, बल्कि इससे बाइक के इंजन पर भी नकारात्मक असर पड़ता है.
उनका कहना है कि कई युवक बाइक को इस तरह से चलाते हैं कि साइलेंसर से पटाखे जैसी आवाज निकलती है. इससे बाइक के इंजन पर दबाव पड़ता है और इंजन जल्दी खराब होने की संभावना बढ़ जाती है.
इसके अलावा मॉडिफाइड साइलेंसर लगाने से बाइक का माइलेज भी कम हो जाता है, जिससे वाहन चालक को लंबे समय में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
ध्वनि प्रदूषण से लोगों को होती है परेशानी
तेज आवाज वाले साइलेंसर के कारण शहर में ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ रहा है. खासकर अस्पताल, स्कूल और रिहायशी इलाकों में इससे लोगों को काफी परेशानी होती है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार देर रात तक तेज आवाज वाली बाइकों के कारण नींद में बाधा आती है. वहीं बुजुर्गों और बच्चों को भी इससे परेशानी होती है.
ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ही यह विशेष अभियान शुरू किया गया है.
जानिए क्या कहते हैं नियम, पहली बार पकड़े जाने पर कितना जुर्माना
नए मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार वाहन में अवैध मॉडिफिकेशन करना कानूनन अपराध है. यदि किसी बाइक में कंपनी के मूल डिजाइन से अलग मॉडिफाइड साइलेंसर पाया जाता है तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.
पहली बार पकड़े जाने पर वाहन चालक पर करीब 5000 रुपये तक का चालान किया जा सकता है.
बार-बार उल्लंघन पर सख्त सजा
यदि कोई वाहन चालक बार-बार मॉडिफाइड साइलेंसर का उपयोग करते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर 5000 से 10000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा कुछ मामलों में 6 महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है.
इन धाराओं के तहत होती है कार्रवाई
धारा 182A (4)
यह धारा वाहन में अवैध मॉडिफिकेशन से संबंधित है. यदि कोई व्यक्ति वाहन में कंपनी द्वारा निर्धारित डिजाइन से अलग बदलाव करता है तो इस धारा के तहत उस पर 5000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
धारा 190 (2)
यह धारा ध्वनि और वायु प्रदूषण से जुड़ी है. यदि बाइक का साइलेंसर तय डेसिबल सीमा से ज्यादा आवाज करता है तो पुलिस इस धारा के तहत चालान कर सकती है.
धारा 194F
इस धारा के तहत हॉर्न या अन्य शोर मचाने वाले उपकरणों के गलत इस्तेमाल पर कार्रवाई की जाती है. कई मामलों में तेज आवाज करने वाले मॉडिफाइड साइलेंसर को भी इसी श्रेणी में शामिल कर कार्रवाई की जाती है.
पुलिस के पास हैं ये अधिकार
साइलेंसर जब्त करने का अधिकार
ट्रैफिक पुलिस के पास यह अधिकार है कि वह मौके पर ही मॉडिफाइड साइलेंसर को बाइक से निकलवाकर जब्त कर सकती है. कई मामलों में इन साइलेंसर को नष्ट भी किया जाता है.
आरसी सस्पेंड भी हो सकती है
यदि कोई वाहन चालक बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी आरसी भी निलंबित या रद्द किया जा सकता है.
वाहन जब्त करने की भी कार्रवाई
कुछ गंभीर मामलों में पुलिस वाहन को थाने में जब्त भी कर सकती है. जब तक बाइक में दोबारा ओरिजिनल साइलेंसर नहीं लगाया जाता, तब तक वाहन को छोड़ा नहीं जाता.
ट्रैफिक डीएसपी ने दी चेतावनी
इस संबंध में ट्रैफिक डीएसपी नीरज कुमार ने कहा कि शहर में मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा.
उन्होंने कहा कि तेज आवाज वाले साइलेंसर से ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है और इससे आम लोगों को काफी परेशानी होती है. इसलिए ट्रैफिक पुलिस ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर रही है.
उन्होंने वाहन चालकों से अपील की कि वे अपनी बाइक में कंपनी द्वारा लगाए गए ओरिजिनल साइलेंसर का ही उपयोग करें और किसी भी प्रकार का अवैध मॉडिफिकेशन न कराएं.
ट्रैफिक पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि रॉयल एनफील्ड बुलेट या किसी भी अन्य बाइक में मॉडिफाइड साइलेंसर लगवाना भारत में एक गंभीर ट्रैफिक उल्लंघन माना जाता है. ऐसे मामलों में पुलिस जुर्माना लगाने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई और वाहन जब्ती तक की कार्रवाई कर सकती है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शहर में ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण करना है, ताकि शहर के लोगों को सुरक्षित और शांत वातावरण मिल सके.

