
उदित वाणी, जमशेदपुर: राजदोहा गांव क्षेत्र के रागा पहाड़ जंगल में सोमवार को पारंपरिक शिकार पर्व ‘आरा बुरू सेंदरा’ मनाया गया. जिले के विभिन्न हिस्सों से भारी संख्या में आदिवासी पारंपरिक हथियारों के साथ रागा पहाड़ की चोटी पर पहुंचे. परंपरा के अनुसार यदि पर्व के दौरान कोई जानवर सामने आता है तो उसका शिकार किया जाता है, लेकिन इस बार कोई जानवर सामने नहीं आया. ऐसे में ग्रामीणों ने परंपरा का निर्वाह किया और वापस लौट गए.

रागा देवता से मांगी खुशहाली, हरियाली और वर्षा की कामना
पर्व की शुरुआत राजदोहा जाहिरगाढ़ में गाजे-बाजे के साथ पूजा-अर्चना से हुई. लाया नाजिर सरदार के नेतृत्व में रागा पहाड़ देवता की अराधना की गई. ग्रामीणों ने गांव की खुशहाली, हरियाली और अच्छी वर्षा के लिए प्रार्थना की. इस अवसर पर ग्राम प्रधान माझी युवराज टुडू, सामाजिक कार्यकर्ता शिवचरण मुर्मू और सागर सरदार ने बताया कि राजदोहा, रानी कूदर और स्वर्ग छिड़ा से बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए थे. सभी ने रागा देवता से क्षेत्र की समृद्धि और सुरक्षा की कामना की.

ग्राम प्रधान युवराज टुडू के अनुसार, यदि शिकार पर्व पर रागा पहाड़ देवता की पूजा नहीं की जाए तो महामारी और विपदाओं का भय बना रहता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे निभाने से पर्व के दौरान वन्यजीवों के हमले की आशंका भी कम रहती है.

वन विभाग की कड़ी निगरानी, हर कदम पर समझाइश
शिकार पर्व के मद्देनज़र राखा माइंस वन प्रक्षेत्र के वन विभाग कर्मियों ने रागा पहाड़ के चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी. वन कर्मी लगातार लोगों को समझाते दिखे कि पर्व के नाम पर किसी प्रकार का वन्य जीव शिकार नहीं किया जाए. वन विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश था कि परंपरा का पालन करते हुए किसी जानवर को क्षति न पहुंचाई जाए. उनकी सतर्कता के बीच सेंदरा पर्व शांतिपूर्वक संपन्न हुआ.
परंपरा और पर्यावरण संतुलन का अनूठा संगम
इस बार का सेंदरा पर्व यह दर्शाता है कि आदिवासी समुदाय अपनी परंपराओं को निभाते हुए भी समय के बदलाव और पर्यावरणीय चेतना के साथ संतुलन स्थापित कर रहा है. शिकार के बिना परंपरा निभाना इस ओर एक सकारात्मक संकेत है.

