
उदित वाणी, रांची/जमशेदपुर: आज 11 नवंबर शुक्रवार को राज्य सरकार ने झारखंड विधानसभा का विशेष एकदिवसीय सत्र आहूत किया है. इस एक दिन के सत्र में अन्य पिछड़ी जातियों के लोगों को 27% आरक्षण देने और सरकारी नौकरियों में 1932 के खतियान को लागू करने को लेकर चर्चा होनी है.
सरकार राज्य की नई डोमिसाइल पॉलिसी और ओबीसी, एससी-एसटी रिजर्वेशन के प्रतिशत में वृद्धि से जुड़े दो अलग-अलग विधेयक पारित कराएगी. सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि ये दोनों विधेयक गेमचेंजर साबित होंगे.
खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कहते हैं कि 11 नवंबर की तारीख झारखंड के लिए ऐतिहासिक साबित होने जा रही है. बिल के कानून का रूप लेने के बाद जिन लोगों के पूर्वज 1932 से पहले राज्य में रह रहे थे और जिनके नाम उस वर्ष के लैंड रिकॉर्ड्स के शामिल थे, वे झारखंड के स्थानीय निवासी माने जाएंगे.
स्थायी निवास रिकॉर्ड नीति (Domicile records policy) की बात करें तो यह राज्य के आदिवासी समूह की प्रमुख मांगों में से एक है. इनका कहना है कि तत्कालीन ब्रिटिश सरकार द्वारा कराए गए आखिरी लैंड सर्वे को स्थानीय लोगों को परिभाषित करने के आधार के तौर पर इस्तेमाल किया गया था और झारखंड सरकार ने सितंबर में इसे मंजूरी दी थी.
हर जगह विधानसभा के विशेष सत्र की खूब चर्चा हो रही है. 1932 के खतियान का मामला बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. इसके पक्ष और विपक्ष में तमाम तरह की दलीले दी जा रही हैं. सोशल मीडिया पर भी आ मुद्दा छाया हुआ है.
इसे लेकर तरह तरह से लोग प्रयोग कर अपने विचारों को सामने ला रहे हैं. नाना प्रकार के कमेंट भी किए जा रहे हैं.
प्रस्तुत है सोशल मीडिया में डेल गए कुछ पोस्ट





