
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में 82 वर्षीय हरिशंकर प्रसाद गुप्ता की मौत को लेकर हुए हंगामे के बाद टाटा स्टील प्रबंधन ने अपना पक्ष रखा है. प्रबंधन की ओर से जारी पक्ष के अनुसार स्वर्गीय गुप्ता को बाईं जांघ की हड्डी (इंटरट्रोकेंटरिक फ्रैक्चर) में चोट के कारण 25 जून 2025 की रात को आपातकालीन रूप से भर्ती किया गया था. मरीज को पहले से गंभीर हृदय रोग (2016 में सीएबीजी) का इतिहास था, जिसे ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक जाँचें और हृदय रोग विशेषज्ञों की राय लेकर आगे की सर्जिकल तैयारी की जा रही थी.
28 जून की सुबह मरीज को अचानक उल्टी हुई, जिससे खाना साँस की नली में चला गया (एस्पिरेशन), जिसके कारण कार्डियक अरेस्ट हुआ. तुरंत कोड ब्लू घोषित किया गया, मरीज को वेंटिलेशन पर लिया गया, सीपीआर तथा अन्य आपातकालीन प्रयास किए गए, लेकिन दुर्भाग्यवश, मरीज को बचाया नहीं जा सका. प्रबंधन का कहना है कि मरीज के इलाज के हर चरण में सभी चिकित्सकीय दिशानिर्देशों का पालन किया गया था. इस घटना में इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई है. मरीज के स्वास्थ्य की जटिलता को देखते हुए चिकित्सकीय टीम ने हरसंभव प्रयास किए.
हमें परिवार के दुख का पूर्ण संवेदना है, परंतु साथ ही यह अपील भी करते हैं कि बिना पुष्टि के लगाए गए आरोपों से चिकित्सकीय टीम का मनोबल न गिराया जाए. टाटा मेन हॉस्पिटल सदैव ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिक चिकित्सा सेवा में विश्वास रखता है. उल्लेखनीय है कि गुप्ता के परिजनों ने टाटा मेन हॉस्पिटल पर आरोप लगाया था कि मरीज की गंभीर स्थिति के बजाय कोई सीनियर डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आया और इलाज में लापरवाही बरती गई.
