
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटानगर रेलवे स्टेशन जो पूर्वी भारत के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल है वह एक बार फिर विवादों के घेरे में है. स्टेशन परिसर की पार्किंग व्यवस्था को लेकर उठे बवाल ने पूरे शहर को झकझोर दिया है. मुख्य गेट से लेकर बर्मामाइंस गेट तक फैली नई पार्किंग का ठेका हाल ही में एक निजी एजेंसी को दिया गया है. हालांकि, यह ठेका अब माफिया राज की चपेट में आ चुका है, ऐसा आरोप आम जनता से लेकर ऑटो चालकों और खुद रेलवे कर्मचारियों तक ने लगाया है.
ठेका में माफिया की दखलंदाजी

पार्किंग व्यवस्था को लेकर जारी विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. इस वीडियो में एक व्यक्ति, कथित रूप से माफिया डॉन सुधीर दुबे का नाम लेकर पार्किंग में पहले से दुकान लगाने वाले एक दुकानदार को खुलेआम धमका रहा है. वीडियो में साफ़ तौर पर धमकाने की भाषा, अधिकार जताना और डराने की शैली देखी जा सकती है, जिसने स्थानीय पुलिस प्रशासन तक को सतर्क कर दिया है.
इस वायरल वीडियो के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है. वीडियो की सत्यता की पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है, लेकिन इसके व्यापक असर से इनकार नहीं किया जा सकता.
अधिक वसूली का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि नई पार्किंग व्यवस्था लागू होने के बाद से ही मनमानी वसूली शुरू हो गई है. पहले जहां दोपहिया वाहनों से ₹10 से ₹15 की वसूली होती थी, वहीं अब ₹20 से ₹30 तक लिया जा रहा है. चारपहिया वाहनों पर तो ₹50 से ₹60 तक की वसूली की खबरें हैं. स्थानीय निवासी राजीव कुमार ने बताया, “अब पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने से पहले सोचना पड़ता है. पहले जितना शुल्क लगता था, अब उससे दोगुना मांगते हैं. पूछने पर गाली-गलौज तक की नौबत आ जाती है.”
ऑटो चालकों की नाराज़गी
स्टेशन पर रोजाना यात्रियों को पहुंचाने वाले ऑटो चालकों का कहना है कि पार्किंग कर्मचारी उनसे भी मनमाने पैसे वसूलते हैं. इतना ही नहीं, कई बार उनसे बदसलूकी और मारपीट तक की घटनाएं हुई हैं. ऑटो चालक यूनियन के अध्यक्ष नवीन सिंह ने कहा, “हम रोजाना स्टेशन तक सवारी छोड़ते हैं. हमें भी ₹10-₹20 जबरन देना पड़ता है. कई बार विरोध करने पर धमकी दी जाती है. जब हमने रेलवे अधिकारियों से बात की, तो उन्होंने टाल-मटोल कर दिया.”
रेलकर्मी भी असंतुष्ट
रेलवे के कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्टेशन पर ड्यूटी करने के बावजूद उन्हें भी पार्किंग के लिए पैसे देने पड़ते हैं. यह पहले कभी नहीं हुआ करता था. एक रेलकर्मी ने कहा, “हम अपनी ड्यूटी पर आते हैं, फिर भी हमसे ₹10-₹20 की मांग की जाती है. विरोध करने पर कहा जाता है कि ठेकेदार से बात करो, हम कुछ नहीं जानते.”
टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि यह नया टेंडर ₹65,000 प्रति दिन के हिसाब से दिया गया है. लेकिन जिस व्यक्ति के नाम पर टेंडर है, वह सिर्फ नाम भर है. असली संचालन किसी और के हाथ में बताया जा रहा है, जो कथित रूप से माफिया गतिविधियों से जुड़ा हुआ है.
रेलवे बोर्ड के एक पूर्व अधिकारी ने बताया,
“इस तरह का ठेका देना और फिर उस पर निगरानी नहीं रखना, रेलवे की लापरवाही को दर्शाता है. ऐसे ठेकों में पारदर्शिता होनी चाहिए. माफिया या बाहरी तत्वों की दखलदाजी से रेलवे की साख को भारी नुकसान पहुंचता है.”
वायरल वीडियो ने बढ़ाया बवाल
वायरल वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दी है. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति गाली-गलौज करते हुए कह रहा है कि “यह जगह सुधीर दुबे की है, यहां दुकान लगाने का हक तुम्हें किसने दिया?” इसके बाद धमकी दी जाती है कि अगर दुकान नहीं हटाई गई तो अंजाम भुगतना होगा. इस वीडियो के सोशल मीडिया पर आते ही शहर में हलचल मच गई. बर्मामाइंस थाना पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लिया है और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
बर्मामाइंस थाना प्रभारी अजय सिंह ने कहा,
“हमें वीडियो मिला है. उसकी सत्यता की जांच की जा रही है. यदि यह वीडियो सही पाया जाता है और कोई व्यक्ति कानून अपने हाथ में लेता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.”
सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि रेलवे प्रशासन अभी तक पूरी तरह से चुप है. न तो किसी अधिकारी ने इस पर कोई आधिकारिक बयान दिया है और न ही किसी प्रकार की जांच या कार्रवाई शुरू की गई है. इससे लोगों में असंतोष और बढ़ता जा रहा है.
यदि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो स्टेशन परिसर में अराजकता की स्थिति बन सकती है. यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है. हर दिन हजारों लोग स्टेशन से यात्रा करते हैं, और इस तरह की स्थिति उनका विश्वास डगमगा सकती है.
रेलवे सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, “हमें ऊपर से निर्देश का इंतजार है. वीडियो सामने आने के बाद हम सतर्क हैं, लेकिन जब तक विभागीय निर्देश नहीं मिलते, हम ठोस कदम नहीं उठा सकते.”
टाटानगर रेलवे स्टेशन की पार्किंग व्यवस्था में उभरे इस विवाद ने प्रशासन, रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जहां एक ओर आम जनता और कर्मचारी त्रस्त हैं, वहीं दूसरी ओर वीडियो में दिख रहे माफिया तत्वों की धमकियों ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रेलवे कब अपनी चुप्पी तोड़ता है और क्या कोई कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला भी कई पुराने मामलों की तरह धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा.

