
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटानगर रेलवे स्टेशन के पार्किंग परिसर में पिछले कई महीनों से चल रहा अव्यवस्था और शुल्क–विवाद आखिरकार तकनीकी समाधान की दहलीज़ पर खड़ा है. चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डिप्टी कमर्शियल मैनेजर आदित्य कुमार चौधरी ने सोमवार को स्टेशन पहुँच कर चार घंटे से ज़्यादा समय तक विभिन्न जोन—प्लेटफॉर्म-एप्रोन, सर्कुलेटिंग एरिया, ड्रॉप-ऑफ लेन और बहुप्रतीक्षित पार्किंग लॉट—का बारीक़ी से निरीक्षण किया. निरीक्षण के बाद उन्होेंने मीडिया से स्पष्ट किया, “कुछ ही दिनों में यहाँ ऑटोमैटिक इलेक्ट्रॉनिक बैरियर लग जाएंगे; मैनुअल पर्ची कटती नज़र नहीं आएगी. यात्रियों को पहले 10 मिनट कोई शुल्क नहीं देना होगा, और पूरी व्यवस्था 23 से ज़्यादा कैमरों की निगरानी में रहेगी. गलत कार्रवाई या अवैध वसूली बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी.”
देर से पहुँची तकनीक, लेकिन उम्मीदें बुलंद
पार्किंग विवाद की जड़ें वर्ष 2023 में उस समय पड़ीं, जब पुराने ठेकेदार ने शुल्क में मनमानी वृद्धि कर दी. तब से ही स्टेशन के बाहर अक्सर ट्रैफ़िक जाम, अनियमित वसूली और झौआ-टिकट नामक अवैध दोहरी रसीद-प्रथा की शिकायतें आती रहीं.
चौधरी ने निरीक्षण के दौरान पार्किंग‐मंडली को दो टूक कह दिया कि “ऑटोमेशन के बाद दलीलें नहीं, डेटा चलेगा. बैरियर लॉग से साफ पता चलेगा कि वाहन कितनी देर रुका और कितना शुल्क बनता है.” सूत्र बताते हैं कि यह बैरियर‐सिस्टम आईआरएसईटीटी-स्वीकृत क्यूआर आधारित पे-एंड-पास मॉडल पर काम करेगा; सॉफ्टवेयर अपडेट मंडल मुख्यालय से समन्वित है और मई अंत में टेस्टिंग पूरी की जा चुकी है.
23 सीसीटीवी कैमरे, 4 हाई-रेज़ डोम और एकीकृत कंट्रोल रूम
नई व्यवस्था की रीढ़ 23 कैमरों का नेटवर्क है, जिनमें चार हाई-रेज़ोल्यूशन पीटीज़ैड डोम कैमरे शामिल हैं जो 360-डिग्री नज़रिया देते हैं. फुटेज कंट्रोल रूम में 30 दिन तक सुरक्षित रहेगी. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पार्किंग लॉट का जीमेट्रिक डिज़ाइन ज़ीरो ब्लाइंड‐स्पॉट का दावा करता है. नियंत्रण कक्ष को आरपीएफ की ई-बीट प्रणाली से जोड़ने की योजना है ताकि संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत ग्राउंड पेट्रोलिंग भेजी जा सके.
“बाक़ी मंडलों से कम है यहाँ शुल्क”
सीनियर डीसीएम ने पत्रकारों को तुलनात्मक आँकड़े दिखाते हुए बताया कि टाटानगर में चार पहिया वाहन की दैनिक अधिकतम पार्किंग दर ₹95 है, जबकि इसी श्रेणी में राँची मंडल ₹180 और हावड़ा मंडल ₹200 वसूलते हैं. दो पहिया वाहनों के लिए टाटानगर का ₹12 प्रति दो घंटे का स्लैब अब भी सबसे कम है. “कम शुल्क होने के बावजूद अनुशासन नहीं दिख रहा था; इसलिए टेक्नोलॉजी लानी ज़रूरी थी,”
यात्रियों, ड्राइवरों और दुकानदारों की जुबानी
अंजलि देवी, रेल यात्री
“मुझे बच्चे व सामान लेकर प्लेटफॉर्म तक पहुँचने में अक्सर आधा घंटा लगता है. अगर 10 मिनट की छूट होगी, तो ड्राइवर भइया जल्दी लौट सकेंगे और हम पर एक्स्ट्रा ₹40 नहीं लगेंगे.”
शकील अंसारी, ऑटो ड्राइवर
“हमारी कमाई ₹300-₹400 दैनिक है. मैनुअल पर्ची वाला लड़का कभी-कभी ₹10 ज़्यादा माँगता था. मशीन से टिकट निकलेगा तो लड़ाई कम होगी.”
विनोद रमण, स्टेशन किताब दुकान मालिक
“कैमरे लगेंगे तो पार्किंग लॉट में जाम कम होगा, ग्राहक प्लेटफॉर्म तक पैदल आसानी से आएँगे. बिक्री बढ़ेगी.”
लक्ष्मी महतो, निजी कार चालक
“पहले एक ही रसीद पर दो बार पैसे माँग लेते थे. अब सेंसर गाड़ी का नंबर प्लेट पढ़ लेगा, तो दोहरी वसूली ख़त्म होगी.”
आरके गुप्ता, वरिष्ठ नागरिक
“मैंने दिल्ली, मुम्बई में ऑटोमैटिक बैरियर देखे हैं. जमशेदपुर में देरी ज़रूर हुई, लेकिन ‘देर आए दुरुस्त आए’.”
रूबीना ख़ान, आरपीएफ कॉन्स्टेबल (महिला स्क्वाड)
“कैमरे लाइव फीड देंगे और हमें मोबाइल ऐप अलर्ट करेगा. इससे छेड़छाड़ और चोरी की घटनाएँ घटेंगी.”
ठेकेदार समूह की दलीलें और रेलवे का रुख
मौजूदा पार्किंग ठेकेदार शारदा इन-ऑन कंस्ट्रक्शन जमशेदपुर के प्रतिनिधि ने दबी ज़ुबान में कहा कि “-मैनुअल न होने से स्टाफ़ कम लगेगा और रोज़गार पर असर पड़ेगा.” किंतु रेलवे अधिकारियों का तर्क है कि स्वचालन के बाद भी परिचालन, रख-रखाव और सुरक्षा के लिए करीब 25 कर्मियों की आवश्यकता होगी; इन्हें अनिवार्य रूप से उसी ठेकेदार से लिया जाना है.
रेलवे सूत्रों के अनुसार, नया कॉन्ट्रैक्ट रेवेन्यू-शेयर मॉडल पर आधारित है, जहाँ 35 प्रतिशत सकल आय सीधे रेलवे खाते में जाएगी, शेष 65 प्रतिशत ठेकेदार परिचालन व्यय समायोजित कर रख लेगा. पुराने मॉडल में ठेकेदार लम्प-सम लाइसेन्स फ़ीस चुका कर मनमानी वसूली करता था.
आरपीएफ–जीआरपी समन्वय और ड्रॉप-ऑफ़ लेन का पुनर्घनत्व
ड्रॉप-ऑफ़ लेन पर ऑटो और कैब की आसमाप्त कतारों से घंटों पैदल यात्री पिसते रहे हैं. डीसीएम चौधरी ने आरपीएफ कमांडेंट और जीआरपी इंस्पेक्टर को संयुक्त गश्त का टाइम-टेबल सौंपा है—सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक हर 45 मिनट पर क्यूआरटी (क्विक रिज़र्व टीम) का भ्रमण अनिवार्य. नई योजना के तहत लेन को 15-15 मीटर के तीन सेगमेंट में बाँटा जाएगा; हर सेगमेंट का इंडक्शन लूप सेंसर वाहन की उपस्थिति लॉग करेगा और लूप-टाइम डेटा कण्ट्रोल रूम में फ्लैग एक्सेस देगा.
डिजिटल भुगतान: क्यूआर, एनएफ़टी और यूपीआई इंटीग्रेशन
पार्किंग टिकट मशीनें आरबीएल बैंक समर्थित रफ़लपार्क 3.0 सॉफ़्टवेयर पर चलेंगी. उपयोगकर्ता क्यूआर कोड स्कैन कर यूपीआई, नेट‐बैंकिंग या एनएफ़टी वॉलेट से शुल्क चुका सकेगा. बिना इंटरनेट वाले फ़ोन के लिए भी विकल्प—एसएमएस लिंक के जरिये भुगतान—मुहैया रहेगा. वरिष्ठ डीसीएम ने स्पष्ट किया, “कैश लेन बनी रहेगी, पर डिजिटल भुगतान पर 5 प्रतिशत प्रोत्साहन छूट मिलेगी.”
तकनीक के भरोसे शुरू होगा सुधार का सफ़र
18 हज़ार यात्रियों की औसत दैनिक आमद और 3,200 वाहनों के आवागमन वाले टाटानगर स्टेशन की पार्किंग देरी से ही सही, किन्तु आधुनिकता की ओर तेज़ी से बढ़ रही है. सीनियर डीसीएम आदित्य कुमार चौधरी की सख़्ती और तकनीकी समाधान के समन्वय से यह परियोजना दक्षिण पूर्व रेलवे में एक नई केस-स्टडी बनेगी.
जब स्टेशन परिसर से बाहर निकलते समय चौधरी से आख़िरी सवाल पूछा गया कि “क्या आप संतुष्ट हैं?”, तो उनका जवाब लक्षणीय था— “संतुष्टि स्थायी शब्द नहीं; रोज़ के डाटा से खुद को चुनौती देना पड़ेगा. अगर सिस्टम एक महीने में बताऊँ कि शिकायत शून्य हुई है, तभी संतोष होगा.”
पार्किंग परिसर के बड़े गेट पर लगी बैनर टैगलाइन अब जैसे इस बदली हुई तैयारी की गवाही दे रही है—‘पहले 10 मिनट मुफ़्त, फिर वसूली बिल्कुल सही’. यात्रियों, ड्राइवरों और रेलवे अधिकारी-कर्मचारियों के बीच बनी इस नई सहमति से उम्मीद है कि टाटानगर स्टेशन जल्द ही “स्वच्छ, सुरक्षित और स्मार्ट पार्किंग” की रैंकिंग में शीर्ष मंडलों में अपना नाम लिखाएगा.

