
उदित वाणी जमशेदपुर : टाटानगर आरपीएफ ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल करते हुए मानव तस्करी के प्रयास को नाकाम कर दिया है। मंगलवार देर शाम आरपीएफ की टीम ने पश्चिम सिंहभूम जिले की पांच नाबालिग लड़कियों को तस्करी के लिए तमिलनाडु ले जाए जाने से पहले ही सुरक्षित बचा लिया। सभी लड़कियों को सड़क मार्ग से चाईबासा से टाटानगर स्टेशन लाया गया था, जहां से उन्हें ट्रेन के जरिए दक्षिण भारत भेजने की तैयारी थी।
आरपीएफ को स्टेशन परिसर में दो संदिग्ध महिलाएं — सविता बिरुआ (मंझारी, पश्चिम सिंहभूम) और बेलमति हेम्ब्रम (पासूहातू, चाईबासा मुफस्सिल) दिखाई दीं, जो पांच लड़कियों को लेकर जल्दबाजी में प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ रही थीं। जवानों ने रोककर पूछताछ की तो दोनों महिलाओं ने शुरू में यह दावा किया कि वे लड़कियों की सहेलियां हैं और निजी काम से तमिलनाडु जा रही हैं। लेकिन उनके जवाबों में बार-बार विरोधाभास देखा गया।
इसके बाद महिला आरपीएफ जवानों की मौजूदगी में सख्ती से पूछताछ की गई। लंबे सवाल-जवाब के बाद दोनों महिलाओं ने स्वीकार कर लिया कि वे नौकरी दिलाने के नाम पर लड़कियों को तमिलनाडु ले जा रही थीं। इसके बदले उन्हें दलालों द्वारा मोटी रकम देने का वादा किया गया था।
आरपीएफ ने तत्काल लड़कियों के परिजनों से संपर्क किया और चाइल्ड लाइन को सूचित कर सभी को सुरक्षित संरक्षण में सौंपा। रेस्क्यू की गई लड़कियों में तीन की उम्र 15 वर्ष और दो की 17 वर्ष बताई गई है। टीम लड़कियों से भी जानकारी जुटा रही है कि किस तरह वे तस्करों के चंगुल में फंस गईं और इसके पीछे कौन-कौन से नेटवर्क सक्रिय हैं।
पूरी कार्रवाई के बाद दोनों गिरफ्तार महिलाओं को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए जीआरपी के हवाले कर दिया गया है। जेल भेजने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
टाटानगर आरपीएफ की यह कार्रवाई न केवल मानव तस्करी की एक बड़ी साजिश को विफल करने का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि रेलवे सुरक्षा बल बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कितनी सतर्क और प्रतिबद्ध है।

