
उदित वाणी, जमशेदपुर : ओबीसी रेलवे कर्मचारी संघ टाटानगर के सचिव मुद्रिका प्रसाद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को दक्षिण-पूर्व रेलवे की प्रधान मुख्य चिकित्सा निदेशक अंजना मल्होत्रा से टाटानगर रेलवे हॉस्पिटल निरीक्षण के लिए पहुंची थी उनसे मुलाकात की. इस दौरान संघ ने टाटा उपमंडल रेल अस्पताल की समस्याओं और अव्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत मांगपत्र सौंपा.
संघ ने बताया कि टाटा रेल अस्पताल में वर्तमान में लगभग 17 हजार पंजीकृत उम्मीद कार्डधारक हैं. इसके अलावा शहर के सुविधायुक्त होने के कारण बड़ी संख्या में रिटायर्ड कर्मचारी और अन्य रेल जोन से कार्यरत कर्मचारियों के परिजन इलाज के लिए आते हैं. यहां रोजाना औसतन 300 से अधिक बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) मरीज और 5 स्टेशन कॉल दर्ज की जाती है. इसके बावजूद अस्पताल में केवल 9 डॉक्टरों के स्वीकृत पद हैं (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक-भारतीय रेलवे स्वास्थ्य सेवा सहित 4 और संविदा चिकित्सा प्रैक्टिशनर-4). जबकि भीड़ चक्रधरपुर मंडल अस्पताल से अधिक है, ऐसे में इतने कम डॉक्टरों के बल पर अस्पताल चलाना कठिन हो गया है.
संघ ने मांग की कि अस्पताल में हृदय रोग, कान-नाक-गला, स्नायु रोग, स्त्री रोग और शिशु रोग जैसी विशेषज्ञ सेवाओं की व्यवस्था की जाए. वर्तमान में विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण मरीजों को बाहर भेजा जाता है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है. प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि जिन अस्पतालों को रेफरल किया जाता है, उनमें केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) दर पर इलाज सुनिश्चित हो. अभी मेडिटरीना और ब्रह्मानंद अस्पताल सीजीएचएस दर पर इलाज करते हैं, जबकि टेल्को अस्पताल अधिक शुल्क लेने के बावजूद बाह्य रोगी विभाग सुविधा सीजीएचएस दर पर नहीं देता. संघ ने टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) समेत अन्य अस्पतालों से भी रेफरल की मांग रखी.
इसके अलावा संघ ने टाटा रेल अस्पताल में क्षय रोग एवं अन्य संक्रामक रोगियों के लिए अलग केबिन, नवजात शिशुओं के लिए नर्सरी, गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू), शल्य कक्ष (ओटी) और अस्पताल का अपना प्रयोगशाला विकसित करने की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि अस्पताल में कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी स्कैन), चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (एमआरआई) और अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी जांच सुविधाएं उपलब्ध न होने से गंभीर मरीजों को अनुभव के आधार पर रोके रखा जाता है और फिर गंभीर अवस्था में रेफर किया जाता है, जो मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ है.
संघ ने रेडियोग्राफर के लिए महिला और पुरुष परिचारक की नियुक्ति, दवाओं की कमी को दूर करने, आयुर्वेदिक और योग इकाई की स्थापना तथा लंबी बीमारी में फंसे रेलकर्मियों के लिए लंबित चिकित्सकीय बोर्ड का गठन कर शीघ्र निष्पादन की भी मांग की.
इस प्रतिनिधिमंडल में संदीप पल, बिजेंद्र यादव, सूरज कुमार, अजय ठाकुर, अमरजीत, राजीव कुमार, सुरेश राव, निकेश कुमार और मनोरंजन समेत कई सदस्य शामिल थे.

