
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटानगर रेलवे स्टेशन परिसर में पार्किंग शुल्क वसूली के नाम पर गुंडागर्दी एक बार फिर से सतह पर आ गई है. खुद को समाजसेवी बताने वाले ठेकेदार के कर्मचारी बताकर आधा दर्जन से अधिक युवक बिना ड्रेस के रायफल लेकर रेलवे क्षेत्र में घूमते देखे गए. इन और आउट गेट पर जबरन कब्जा जमा चुके इन कर्मियों की मनमानी पर न तो स्टेशन डायरेक्टर कुछ बोल रहे हैं और न ही आरपीएफ हरकत में आ रही है.
शनिवार देर रात जब शहर के दबंग डीएसपी भोला प्रसाद स्टेशन पहुंचे तो उनके साथ भी पार्किंग कर्मियों की बदसलूकी हो गई. ड्रॉपिंग जोन में स्कॉर्पियो लेकर पहुंचे डीएसपी को ‘पहले पर्ची कटाइए’ कहकर रोक दिया गया. परिचय देने के बावजूद बदतमीजी जारी रही. बात बढ़ने पर डीएसपी ने स्कॉर्पियो बीच पार्किंग में खड़ी कर दी और स्थानीय पुलिस को बुला लिया.
इसके बाद जो हुआ, वह पार्किंग ठेकेदार की दबंगई से त्रस्त लोगों के लिए राहत बन गया. पुलिसकर्मियों ने पार्किंग में मौजूद कर्मियों की खदेड़-खदेड़ कर पिटाई कर दी. चार से पांच कर्मचारियों को दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया. आधे घंटे तक चली कार्रवाई में ठेकेदार के गुर्गे भागते नजर आए. घटना के बाद रेल पुलिस मौके पर पहुंची और सभी कर्मचारियों की पहचान के लिए आधार व फोटो मंगवाया गया. साथ ही पार्किंग मैनेजर से पूरी सूची मांगी गई है.
रेलवे ने यह भी निर्देश जारी किया है कि सभी पार्किंग स्टाफ को ड्रेस और कंपनी आईडी कार्ड के साथ ही ड्यूटी पर रहना होगा. बावजूद इसके रविवार सुबह स्थिति फिर वैसी ही नजर आई. आउट गेट पर अब भी गाड़ियों को रोका जा रहा है, जिससे लगातार जाम की स्थिति बनी हुई है.
रेल प्रशासन और आरपीएफ की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं. ठेकेदार के कब्जे को लेकर सीनियर डीएसएम की भूमिका पर भी उंगलियां उठ रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि डीएसपी की कार्रवाई ने जरूर राहत दी, लेकिन स्थायी समाधान के बिना यह गुंडागर्दी खत्म नहीं होगी.
