
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटानगर रेल सिविल डिफेंस टीम द्वारा शुक्रवार को बिरसानगर स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. इस प्रशिक्षण शिविर में चिकित्सकों, पारा मेडिकल स्टाफ और सहिया दीदियों को विषैले और विषहीन सर्प के काटने की पहचान, प्राथमिक उपचार की विधियां, कुत्ते के काटने पर जरूरी एहतियात, तथा झारखंड सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए ड्राई केमिकल फायर एक्सटिंग्विशर के उपयोग के तरीके और उससे जुड़ी सावधानियों की जानकारी दी गई.
सर्पदंश की पहचान और प्राथमिक उपचार पर हुआ विशेष फोकस
शिविर की शुरुआत सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार द्वारा दी गई प्रजेंटेशन से हुई, जिसमें उन्होंने पीपीटी और वीडियो की मदद से विषैले और विषहीन सर्प के बीच अंतर, शरीर पर होने वाले लक्षणों, तथा प्राथमिक उपचार की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में तुरंत ‘बैंडेज’ और ‘स्प्लिंट’ का सही तरीके से उपयोग करते हुए पीड़ित को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजना आवश्यक है, जहां समय पर एंटी वेनम इंजेक्शन लगाया जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि सर्पदंश के मामलों में ओझा-गुणी, झाड़-फूंक और अंधविश्वास से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इससे जान बचाने में देरी हो सकती है.
कुत्ता काटने पर सावधानी और रेबीज से बचाव की जानकारी
संतोष कुमार ने कुत्ता काटने के मामलों में शरीर पर दिखने वाले लक्षण, तुरंत किए जाने वाले साफ-सफाई के उपाय, तथा रेबीज रोधी टीका लगाने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने टेली फिल्म के माध्यम से रेबीज संक्रमित कुत्ते की पहचान, उसके व्यवहारिक लक्षण, और उससे जुड़े उपचार की विस्तृत जानकारी दी.
अग्निशमन उपकरण का मॉक ड्रिल और एलपीजी गैस लीक से बचाव की जानकारी
प्रशिक्षण शिविर के दौरान डेमोंस्ट्रेटर शंकर प्रसाद ने ड्राई केमिकल पाउडर वाले फायर एक्सटिंग्विशर की उपयोग विधि और सावधानियों को लेकर मॉक ड्रिल किया. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे यंत्रों का सही इस्तेमाल ही किसी बड़ी दुर्घटना को रोक सकता है.
वहीं डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह ने एलपीजी गैस लीक होने की स्थिति में उत्पन्न आग को बुझाने के विभिन्न तरीकों को मॉक ड्रिल के जरिए दिखाया. उन्होंने आग लगने पर घबराने की बजाय संयम से काम लेते हुए सुरक्षित निकासी, मुख्य गैस लाइन बंद करना, और सही अग्निशमन तकनीक अपनाने की सलाह दी.
स्वास्थ्य कर्मियों की रही सक्रिय भागीदारी
इस प्रशिक्षण शिविर में स्वास्थ्य केंद्र के कई कर्मियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख रूप से प्रदीप कुमार (पी एच एम), राजेश साहू (लैब टेक्नीशियन), विमल दास (फार्मासिस्ट), एएनएम पुष्पलता बारीक, सविता महतो, अंबिका बकला, सानिया देवी रजक, सहिया दीदी अलका सिंह, अंजलि, रजनी हेरेंज, प्रभावती कुजूर, सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे. सभी प्रतिभागियों ने मॉक ड्रिल में रुचि से भाग लिया और प्रशिक्षण को उपयोगी व व्यावहारिक बताया.
प्रशिक्षण से स्वास्थ्य कर्मियों में आत्मविश्वास
स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एएनएम सविता महतो ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों को आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेने और मरीजों को सही समय पर प्राथमिक उपचार देने में सहायता मिलती है. वहीं फार्मासिस्ट विमल दास ने अग्निशमन यंत्रों की मॉक ड्रिल को बहुत जानकारीपूर्ण और व्यावहारिक बताया.
सिविल डिफेंस टीम की सराहना
स्वास्थ्य कर्मियों और सहिया दीदियों ने सिविल डिफेंस टीम की ओर से दिए गए इस विशेष प्रशिक्षण को जनहित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां समय-समय पर अन्य इलाकों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी आयोजित की जानी चाहिए ताकि ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में कार्यरत सभी स्वास्थ्यकर्मी आपात स्थिति से निपटने में दक्ष बन सकें.
यह एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर जहां एक ओर जन-जागरूकता और व्यवहारिक शिक्षा का सशक्त उदाहरण बना, वहीं दूसरी ओर आपदा प्रबंधन, अग्निशमन, और प्राथमिक चिकित्सा के क्षेत्र में स्वास्थ्यकर्मियों को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास देने वाला साबित हुआ. टाटानगर रेल सिविल डिफेंस की यह पहल निश्चित रूप से जनस्वास्थ्य और सुरक्षा की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है.

